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UGC के नए नियम पर SC की रोक, दिल्ली से पटना तक प्रदर्शनकारियों में खुशी, फैसले पर नेता भी बोले

SC के इस रोक पर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि हमारा मानना है कि दोषी न बचे, साथ ही निर्दोष के साथ अन्याय भी ना हो। इससे पहले भी 2012 में नियम आए थे। 2012 में क्या कमी रही, क्या-क्या फैसले हुए थे, सुप्रीम कोर्ट को सबको स्वीकार करना पड़ेगा। सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है।

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यूजीसी के नए नियम पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक।

Photo : PTI

SC stays on UGC new Regulation : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियम सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को रोक लगा दी। दरअसल, उच्च शिक्षा संस्थानों में 'समानता' को बढ़ावा देने के लिए यूजीसी ने बीते 23 जनवरी को नया नियम जारी किया था। इसके खिलाफ देश भर में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे और सरकार से इसे वापस लेने की मांग की जा रही थी। सुप्रीम कोर्ट में दायर अर्जी में यूजीसी के नियमों को 'मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के खिलाफ बताया गया था। शीर्ष अदालत द्वारा यूजीसी के इस नियम पर रोक लगाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी खुश हैं और उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, कई लोगों ने संसद के इस सत्र में सरकार से इसे पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। कोर्ट का फैसला आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

अखिलेश बोले-न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय

SC के इस रोक पर समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि हमारा मानना है कि दोषी न बचे, साथ ही निर्दोष के साथ अन्याय भी ना हो। इससे पहले भी 2012 में नियम आए थे। 2012 में क्या कमी रही, क्या-क्या फैसले हुए थे, सुप्रीम कोर्ट को सबको स्वीकार करना पड़ेगा। सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता है, माननीय न्यायालय यही सुनिश्चित करता है। कानून की भाषा भी साफ होनी चाहिए और भाव भी। बात सिर्फ नियम नहीं, नीयत की भी होती है। न किसी का उत्पीड़न हो, न किसी के साथ अन्याय।'

सख्ती से ये कानून लागू हो-उमेश कुशवाहा

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए जद-यू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि यूनिवर्सिटी में छात्रों की अलग राय सामने आ रही है। अब तक धरना प्रदर्शन कर रहे छात्र सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत कर रहे हैं तो आरक्षित श्रेणी के छात्र सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निराश हैं। उनका कहना है कि सरकार को इसे वापस नहीं लेना चाहिए। संशोधन जरूर हो लेकिन सख्ती से ये कानून लागू हो इसकी व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि यूनिवर्सिटी में जातिगत भेदभाव है।

एक-दूसरे को गुलाल लगाकर जश्न मनाया

दिल्ली में यूजीसी के नए नियम का विरोध करने वाले छात्र कोर्ट का फैसला आने के बाद लड्डू बांटने की बात करते दिखाई दिए। छात्रों ने एससी के फैसले का स्वागत किया। वाराणसी में यूजीसी के नियम पर रोक के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर जश्न मनाया। इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट आभार जताते हुए लोगों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। वहीं, पटना में UGC के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद लोग संतुष्ट नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए लोगों ने सरकार से इस नियम को संसद के इस सत्र में पूरी तरह से खत्म करने की मांग की है। आज पटना में UGC नियम के खिलाफ करणी सेना ने प्रदर्शन किया।

आगे सुनवाई होगी-राजभर

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि 'जिस दिन से UGC का नियम आया मैं उसी दिन से कह रहा था कि सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला है आप जाओ न्याय मिलेगा। सरकार ने कहा कि कमेटी बना देते हैं, 15 दिन में जो रिपोर्ट आएगी और संशोधन करना होगा कर लिया जाएगा। आज सुप्रीम कोर्ट ने उनकी बात को माना और रोक लगाई है। आगे सुनवाई होगी।'

JDU नेता राजीव रंजन प्रसाद ने UGC रेगुलेशन 2026 रोक पर के फैसले पर कहा कि 'यह न्यायिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है। कोर्ट ने रोक लगाई है। जहां तक केंद्र सरकार से जानकारी मांगने का सवाल है तो केंद्र सरकार अपने हलफनामे के जरिए सभी तथ्यों पर सरकार का पक्ष रखेगी।

Saket kumar
साकेत कुमारauthor

साकेत कुमार के पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 18 वर्षों का लंबा अनुभव है। वर्तमान में वह Times Now Navbharat के पटना ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं और बिहार की राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों और ग्राउंड रिपोर्टिंग में गहरी पकड़ रखते हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान कई महत्वपूर्ण खबरों को कवर किया है और निष्पक्ष, तथ्यपरक और सटीक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। साकेट की रिपोर्टिंग में जमीनी हकीकत, गहन रिसर्च और दर्शकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने की प्रतिबद्धता साफ दिखाई देती है।

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