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फिल्म निर्माता, परेश रावल को SC के वकील ने भेजा कानूनी नोटिस, बोले- 'द ताज स्टोरी' उनकी पुस्तक पर आधारित लेकिन श्रेय नहीं दिया

सुप्रीम कोर्ट के वकील रुद्र विक्रम सिंह का कहना है कि उन्होंने कई सालों की शोध के बाद 2023 में किताब '22 रूम्स ऑफ ताजमहल' लिखी थी। इस किताब में उन्होंने ताजमहल के बंद 22 कमरों से जुड़ी ऐतिहासिक और तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत की थी। उनका कहना है कि उन्होंने खुद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी

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विवादों में आई फिल्म 'द ताज स्टोरी।' तस्वीर-PTI

Photo : PTI

The Taj Story: सुप्रीम कोर्ट के वकील और लेखक रुद्र विक्रम सिंह ने फिल्म 'द ताज स्टोरी' के निर्माता, निर्देशक और अभिनेता परेश रावल को कानूनी (लीगल) नोटिस भेजा है। रुद्र विक्रम सिंह का आरोप है कि यह फिल्म उनकी किताब '22 रूम्स ऑफ ताजमहल' पर आधारित है, लेकिन फिल्म में न तो उन्हें कोई श्रेय दिया गया और न ही उनकी अनुमति ली गई।

अपनी किताब पर फिल्म बनाने का आरोप

रुद्र विक्रम सिंह का कहना है कि उन्होंने कई सालों की शोध के बाद 2023 में किताब '22 रूम्स ऑफ ताजमहल' लिखी थी। इस किताब में उन्होंने ताजमहल के बंद 22 कमरों से जुड़ी ऐतिहासिक और तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत की थी। उनका कहना है कि उन्होंने खुद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी, जिसके बाद ही देश और दुनिया को इन 22 कमरों के रहस्य के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने कहा कि फिल्म 'द ताज स्टोरी' में वही तथ्य और विचार दिखाए गए हैं जो उनकी किताब और शोध का हिस्सा हैं, लेकिन फिल्म के पोस्टर, ट्रेलर या क्रेडिट्स में कहीं उनका नाम नहीं दिया गया।

लीगल नोटिस में गंभीर आरोप

सिंह की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता आशीर्वाद कुमार यादव ने यह लीगल नोटिस 4 नवंबर 2025 को जारी किया। नोटिस में कहा गया है कि फिल्म के निर्देशक तुषार अमरीश गोयल, निर्माता सी.ए. सुरेश झा और प्रोडक्शन कंपनी स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज प्रा. लि. ने उनकी पुस्तक और शोध सामग्री का अनधिकृत उपयोग किया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि रुद्र विक्रम सिंह की रचनात्मक अभिव्यक्ति और तथ्यों की प्रस्तुति उनके बौद्धिक अधिकार के अंतर्गत आती है, जिसे बिना अनुमति उपयोग करना कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है।

फिल्म टीम से मांगी गई तीन प्रमुख मांगें

लीगल नोटिस में कहा गया है कि फिल्म निर्माताओं को 15 दिन के भीतर निम्न कदम उठाने होंगे:

1. रुद्र विक्रम सिंह को 'द ताज स्टोरी' के मूल लेखक और शोधकर्ता के रूप में सार्वजनिक रूप से मान्यता दें।

2. फिल्म और भविष्य की सभी प्रचार सामग्री में उनका नाम शामिल करें।

3. सोशल मीडिया और प्रेस के माध्यम से सार्वजनिक माफी जारी करें।

सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों में इन मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे फिल्म टीम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे।

लेखक ने कहा मेरे शोध का फायदा दूसरों ने उठाया

रुद्र विक्रम सिंह ने कहा, 'मैंने सालों तक अध्ययन और प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर यह शोध किया। मैंने पहली बार इस मुद्दे को अदालत में उठाया। आज वही विचार फिल्म में दिखाए जा रहे हैं, पर मुझे कोई श्रेय नहीं दिया गया।' उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं बल्कि बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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