रिपब्लिक डे पर वीरों का सम्मान; सेना और नौसेना के जवानों को मिला कीर्ति-शौर्य चक्र
- Curated by: Nishant Tiwari
- Updated Jan 26, 2026, 03:21 PM IST
रिपब्लिक डे की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने भारतीय सेना और नौसेना के जांबाज़ों को देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता सम्मानों से नवाजा। म्यांमार सीमा से लेकर जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ तक चले खतरनाक अभियानों, आमने-सामने की मुठभेड़ों, आतंकवाद-रोधी ऑपरेशनों और समुद्र में जानलेवा परिस्थितियों के बीच इन वीरों ने अदम्य साहस, नेतृत्व और बलिदान का परिचय दिया। कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र से सम्मानित इन कहानियों में न सिर्फ युद्ध कौशल, बल्कि देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने का जज्बा भी झलकता है।
रिब्लिक डे परेड के लिए कर्तव्य पथ पर रिहर्सल करते जवान (PTI)
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने भारतीय सेना और नौसेना के जांबाज़ों को उनके असाधारण साहस और बलिदान के लिए सर्वोच्च वीरता सम्मान प्रदान किए हैं। इस साल दो कीर्ति चक्र और 10 शौर्य चक्र देने की घोषणा की गई है, जिनमें एक शौर्य चक्र मरणोपरांत दिया गया। इसके अलावा वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए बड़ी संख्या में सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक और ‘मेंशन इन डिस्पैचेज’ भी स्वीकृत किए गए हैं। ये सम्मान जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर और समुद्र के खतरनाक इलाकों तक चले अभियानों की गवाही देते हैं।
सम्मान सूची: वीरता और सेवा का व्यापक सम्मान
इस वर्ष सम्मान सूची में एक बार टू सेना मेडल (वीरता) और 44 सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं, जिनमें पांच मरणोपरांत हैं। इसके साथ ही 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल, चार उत्तम युद्ध सेवा मेडल, 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल, सात युद्ध सेवा मेडल, दो बार टू सेना मेडल (विशिष्ट सेवा), 43 सेना मेडल (विशिष्ट सेवा) और 85 विशिष्ट सेवा मेडल भी दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, ऑपरेशन रक्षक, ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, ऑपरेशन हिफ़ाज़त, ऑपरेशन ऑर्किड और ऑपरेशन मेघदूत जैसे उच्च जोखिम अभियानों में शामिल 81 कर्मियों को ‘मेंशन इन डिस्पैचेज’ से सम्मानित किया गया।
कीर्ति चक्र: दुश्मन की आग के बीच अदम्य साहस
मेजर अरशदीप सिंह (1 असम राइफल्स) को 14 मई 2025 को भारत-म्यांमार सीमा पर एक बेहद जोखिमभरे गश्ती अभियान के दौरान अद्वितीय साहस के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। घने जंगल और ऊंचाई से हो रही भारी फायरिंग के बीच उन्होंने पीछे हटने के बजाय सीधा हमला बोला और रॉकेट लॉन्चर से लैस आतंकवादी समेत कई उग्रवादियों को ढेर कर दिया। उनकी निर्णायक कार्रवाई से एक भी जवान को नुकसान नहीं हुआ। नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा (2 पैरा स्पेशल फोर्सेज) को अप्रैल 2025 में किश्तवाड़ के जंगलों में हुए आतंकी ऑपरेशन में साहस दिखाने के लिए कीर्ति चक्र दिया गया। उन्होंने बेहद नज़दीक जाकर मुठभेड़ में एक विदेशी आतंकवादी को मार गिराया और दूसरे को भी ढेर किया।
शौर्य चक्र: जिन फैसलों ने बदला ऑपरेशन का नतीजा
इस वर्ष शौर्य चक्र पाने वालों में काउंटर-टेरर ऑपरेशनों से लेकर विशेष अभियानों में शामिल अधिकारी और जवान शामिल हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार (21 पैरा एसएफ) को भारत-म्यांमार सीमा पर जुलाई 2025 में किए गए सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाने और नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया, जिसमें नौ आतंकवादी मारे गए। मेजर अंशुल बलटू (32 असम राइफल्स), मेजर शिवकांत यादव (5 पैरा एसएफ), मेजर विवेक (42 राष्ट्रीय राइफल्स) और मेजर लीशांगथेम दीपक सिंह (11 पैरा एसएफ) को अलग-अलग अभियानों में आतंकियों को ढेर करने और नागरिकों की जान बचाने के लिए शौर्य चक्र मिला। कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर (6 पैरा एसएफ) और सूबेदार पी.एच. मोसेस (1 असम राइफल्स) ने भारी गोलीबारी के बीच साहसिक कार्रवाई कर मिशन को सफल बनाया।
मरणोपरांत सम्मान: अंतिम सांस तक लड़ते रहे
एकमात्र मरणोपरांत शौर्य चक्र लांस दफादार बलदेव चंद (4 राष्ट्रीय राइफल्स) को दिया गया। सितंबर 2025 में किश्तवाड़ के ऊंचे पहाड़ों में उन्होंने आमने-सामने की लड़ाई में एक आतंकवादी को निहत्था किया, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अंत तक लड़ते रहे और वीरगति को प्राप्त हुए। राइफलमैन मंगलेम सांग वैफेई और राइफलमैन धुर्बा ज्योति दत्ता को भी असाधारण बहादुरी के लिए शौर्य चक्र मिला।
समुद्र में भी शौर्य की मिसाल
वीरता सिर्फ युद्धभूमि तक सीमित नहीं रही। नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए. को आईएनएसवी तारिणी पर 238 दिन की ऐतिहासिक समुद्री यात्रा के लिए शौर्य चक्र दिया गया। इस दौरान उन्होंने 25,600 समुद्री मील से अधिक की यात्रा की और खतरनाक ड्रेक पैसेज में नाव को डूबने से बचाया। वहीं कमांडर हरप्रीत सिंह को श्रीलंका के पास भीषण तूफान के दौरान आईएनएस तारंगिनी को सुरक्षित कोच्चि तक लाने के लिए नौ सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया।
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