Meerut: मेरठ के मंगतपुरम में करीब दो साल से धर्मांतरण (Conversion) की पाठशाला चल रही थी, लेकिन एलआईयू (LIU) को भनक तक नहीं लगी। शुक्रवार को खबर फैली तो बजरंग दल के कार्यकर्ताओं (Bajrang Dal Workers) समेत अन्य हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता मंगतपुरम पहुंचे। उन्होंने क्रिश्चियन धर्म (Christianity) से जुड़ी किताबें और आर्थिक मदद लेने वाले लोगों की सूची ढूंढ ली। इस मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। वहीं अब इस मामले में 9 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके जांच के आदेश दिए गए हैं।
मेरठ में सामने आया धर्म परिवर्तन का मामला
यहां झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों की संख्या 400 से ज्यादा बताई जा रही है। लॉकडाउन में भुखमरी मची तो इन लोगों की मदद के लिए दिल्ली के महेश पासचर पहुंचे, जो क्रिश्चियन बताए गए हैं। आरोप है कि महेश पासचर ने कुछ लोगों को भरोसे में लेकर झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों को क्रिश्चियन धर्म से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। नतीजा ये हुआ कि लोग चर्च में जाने लगे और उनका धर्म परिवर्तन भी किया गया। ये सिलसिला करीब दो साल से चल रहा है।
गरीबी का फायदा उठाकर लोगों का कराया गया धर्मांतरण
वहीं शुक्रवार को जब मामला एसएसपी ऑफिस पहुंचा तो पुलिस प्रशासन की नींद टूटी। भाजपा नेताओं और हिन्दू संगठन के लोगों ने बताया कि मंगतपुरम में मिलीं क्रिश्चियन धर्म की पुस्तकें और आर्थिक मदद लेने वालों की सूची का रजिस्टर पुलिस को सौंपा गया है। कार्यकर्ताओं का कहना कि गरीबी का फायदा उठाकर लोगों का धर्मांतरण कराया गया है। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के मंगतपुरम पहुंचने और लोगों के हंगामा करने पर वहां पुलिस बल लगाया गया।
पुलिस ने झुग्गी-झोपड़ी निवासियों को समझाया कि किसी के बहकावे में आकर कानून-व्यवस्था न बिगाड़े। शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही कहा कि सभी नामजद आरोपी गिरफ्तार होंगे। झुग्गी में रहने वाले चैम्पियन नाम के युवक ने धर्मांतरण का विरोध किया है। लोगों के घरों से देवी-देवताओं के पोस्टर हटवाने के लिए रेलवे रोड निवासी अनिल और उसके साथियों को लगाया गया था। अनिल मुख्य आरोपी महेश पासचर का नौकर है। देवी-देवता के पोस्टर फाड़ने पर चैम्पियन ने इसकी सूचना दी। उसने पुलिस को धर्मांतरण कराने जाने के कई साक्ष्य समेत काफी संख्या में वीडियो सौंपे हैं।
