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राजपाल यादव को दिल्ली HC से नहीं मिली राहत, जमानत याचिका हुई खारिज; पढ़ें चेक बाउंस का पूरा मामला

Rajpal Yadav Case: चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में बंद बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मुरली प्रोजेक्ट कंपनी को नोटिस जारी किया है। मामला कथित रूप से पैसों की वापसी से जुड़ा है। राजपाल यादव ने शाहजहांपुर में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए अदालत से जमानत की मांग की है। इस मामले पर 16 फरवरी को दोबारा सुनवाई होगी।

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एक्टर राजपाल यादव की जमानत याचिका हुई खारिज।

Photo : Twitter

Rajpal Yadav Case: चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल में बंद बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मुरली प्रोजेक्ट कंपनी को नोटिस जारी किया है। मामला कथित रूप से पैसों की वापसी से जुड़ा है। राजपाल यादव ने शाहजहांपुर में अपनी भतीजी की शादी में शामिल होने के लिए अदालत से जमानत की मांग की है। इस मामले पर 16 फरवरी को दोबारा सुनवाई होगी।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकीलों ने पैसों से जुड़े मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत से कहा कि उन्हें इस संबंध में राजपाल यादव से विस्तृत निर्देश लेने हैं।

जमानत याचिका पर विस्तार से की जाएगी सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई सोमवार को तय की है, जहां जमानत याचिका पर विस्तार से सुनवाई की जाएगी। फिलहाल अभिनेता को किसी प्रकार की तत्काल राहत नहीं मिली है और सभी की निगाहें अब सोमवार की सुनवाई पर टिकी हैं।

क्या है मामला?

यह मामला राजपाल यादव से जुड़े चर्चित चेक बाउंस प्रकरण का है, जिसमें करीब 9 करोड़ रुपये की देनदारी बताई गई है। इसकी शुरुआत साल 2010 में हुई थी, जब राजपाल यादव ने अपनी पहली निर्देशित फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।

चेक बाउंस हुए और कंपनी ने किया केस

फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही, जिसके बाद लिया गया कर्ज समय पर नहीं चुकाया जा सका। मूल रकम पर ब्याज, पेनल्टी और देरी शुल्क जुड़ते गए, जिससे कुल बकाया राशि बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। कर्ज चुकाने के लिए जारी किए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके बाद कंपनी ने अलग-अलग आधार पर सात मामले दर्ज कराए।

छह महीने की सुनाई गई सजा

2018 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी करार देते हुए छह महीने की सजा सुनाई। 2019 में सत्र न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा।

जून 2024 में हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाई, लेकिन यह राहत शर्तों के साथ दी गई थी। अदालत ने कहा था कि वे समझौते के तहत तय राशि का भुगतान करेंगे। अदालत की ओर से उन्हें कई अवसर दिए गए, और 2025 में उन्होंने 75 लाख रुपये जमा भी किए, लेकिन शेष रकम का भुगतान नहीं किया गया।

अदालत ने बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद भुगतान न होने पर कड़ी टिप्पणी की और इसे गंभीरता से लिया। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने उन्हें अंतिम रूप से सरेंडर करने का आदेश दिया। आदेश के पालन में 5 फरवरी 2026 को राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया।

उन्हें छह महीने की सजा भुगतनी होगी। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सजा पूरी कर लेने के बाद भी कर्ज स्वतः समाप्त नहीं होगा। बकाया राशि का भुगतान करना अब भी कानूनी रूप से अनिवार्य रहेगा।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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