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Cyclone Biparjoy Updates: अगले 12 घंटे काफी अहम, गुजरात में तबाही मचाने के बाद राजस्थान में भारी बारिश शुरू, IMD ने किया अलर्ट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 17, 2023, 07:47 AM IST

Cyclone Biparjoy Updates: मौसम विभाग ने कहा है कि चक्रवाती तूफान 16 जून की रात दक्षिण-पश्चिम राजस्थान से सटे दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान और धोलावीरा से करीब 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में कच्छ के ऊपर एक गहरे डिप्रेशन में कमजोर हो गया है। अब यह 80-90 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने वाला तूफान है।

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राजस्थान के उदयपुर में भारी बारिश

Photo : ANI

Cyclone Biparjoy Updates: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चक्रवाती तूफान बिपरजॉय को लेकर खास अपडेट दिया है। मौसम विभाग का कहना है कि गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ की तटीय इलाकों में भयंकर तबाही मचाने के बाद चक्रवात बिपरजॉय का राजस्थान में असर दिखेगा। शनिवार सुबह राजस्थान के उदयपुर में भयानक बारिश भी शुरू हो गई। इस दौरान हवाएं भी काफी तेज थीं। मौसम विभाग ने राजस्थान में बिपरजॉय के कारण भारी से भारी बारिश का अलर्ट भी जारी किया गया है।

हालांकि, मौसम विभाग ने कहा है कि चक्रवाती तूफान 16 जून की रात दक्षिण-पश्चिम राजस्थान से सटे दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान और धोलावीरा से करीब 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में कच्छ के ऊपर एक गहरे डिप्रेशन में कमजोर हो गया है। अब यह 80-90 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने वाला तूफान है। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 12 घंटों के दौरान इसके एक डिप्रेशन में और कमजोर होने की उम्मीद है।

गुजरात में 4600 गांव प्रभावित

जानकारी के मुताबिक, चक्रवात बिपरजॉय के कारण गुजरात में काफी नुकसान हुआ है। गुजरात सरकार की ओर से हुए नुकसान के बारे में जानकारी दी गई है। बताया गया है कि चक्रवात की वजह से तटीय इलाकों के करीब 4600 गांव प्रभावित हुए हैं। वहीं अब तक 581 पेड़ों के गिरने की सूचना है और 5120 बिजली के खंभे भी गिर गए हैं। चक्रवात के कारण गुजरात के तीन हाईवे को बंद करना पड़ा है। वहीं, एनडीआरएफ की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, लैंडफॉल से पहले दो लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद कोई जनहानि नहीं हुई है। करीब 24 जानवरों की मौत हई है और 23 लोग घायल बताए जा रहे हैं।

पाकिस्तान में नहीं हुआ ज्यादा नुकसान

चक्रवात बिपरजॉय के प्रकोप से पाकिस्तान काफी हद तक बच गया। चक्रवात के गुजर जाने के बाद सिंध प्रांत के तटीय क्षेत्रों में इमरजेंसी सर्विसेस को भी हटाया जा रहा है। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री का कहना है कि शुक्र है, हम चक्रवात के विनाश से काफी हद तक सुरक्षित हैं। हालांकि, यहां तटीय क्षेत्रों से निकाले गए लोगों को वापस भेजने में कुछ समय जरूर लग सकता है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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