कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर मनरेगा को लेकर जमकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने बिना कैबिनेट से पूछे मनरेगा को खत्म करने का फैसला ले लिया। उन्होंने कहा कि मनरेगा पर किया गया हमला सीधे-सीधे राज्यों के अधिकारों और गरीबों के हितों पर हमला है।
राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों का वह पैसा छीन रही है,जो उनका हक है। इसके साथ ही राज्यों से फैसले लेने की शक्ति भी छीनी जा रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा केवल रोजगार देने की योजना नहीं है,बल्कि यह एक विकास मॉडल है,जिसके जरिए गांवों में बुनियादी ढांचा तैयार किया गया। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विदेश यात्राओं के दौरान बताया था कि कई देशों ने भारत की इस अधिकार आधारित विकास सोच की सराहना की है। लेकिन प्रधानमंत्री ने बिना गहराई से अध्ययन किए इस योजना को कमजोर कर दिया।
यह नोटबंदी जैसा फैसला
राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा पर चोट का असर सबसे ज्यादा गरीबों,आदिवासियों,दलितों,ओबीसी अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्गों पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम नोटबंदी की तरह एकतरफा फैसला है, जिससे आम लोगों को भारी नुकसान होगा। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि गरीबों से छीना गया पैसा बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका आरोप था कि इस पूरी प्रक्रिया से सबसे ज्यादा लाभ अडानी जैसे बड़े कॉरपोरेट घरानों को मिलेगा,जबकि देश के कमजोर वर्गों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने मनरेगा खत्म करने का फैसला कैबिनेट से बिना पूछे किया
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का कदम देश के संघीय ढांचे कर हमला और सत्ता एवं वित्तीय व्यवस्था का केंद्रीकरण है। मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कैबिनेट से बिना पूछे सीधा प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि वन मैन शो चल रहा है, मोदी जो चाहते हैं वही करते हैं।
बता दें कि संसद ने विपक्ष के हंगामे के बीच बीते 18 दिसंबर को ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक, 2025’ को मंजूरी थी। जिसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इसपर अपनी मुहर लगा दी। जिसके बाद अब यह अधिनियम बन चुका है। यह 20 साल पुराने मनरेगा की जगह लेगा।
