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Rahul Gandhi का सियासी ट्रांसफार्मेशन...ट्रक वाया गैराज, अब सीधे पहुंचे खेत; कितना बदले Congress के 'युवराज'

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 8, 2023, 03:35 PM IST

Rahul Gandhi: कांग्रेस और राहुल गांधी में इस आमूलचूल परिवर्तन की तस्वीर को देश ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान देखा...जब कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक राहुल गांधी पैदल चले। इसके बाद से राहुल गांधी कई मौकों पर लोगों को चौंका चुके हैं।

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सोनीपत में ट्रैक्टर चलाते राहुल गांधी

Photo : Twitter

Rahul Gandhi: 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस लगातार अपनी जमीन खो रही थी। एक समय ऐसा आया, जब ज्यादातर राज्यों BJP की सरकार बनी और कांग्रेस का सूपड़ा लगभग साफ हो गया। कहा जाने लगा कि कांग्रेस अब खत्म हो चुकी है और भाजपा के मुकाबले अन्य विकल्पों पर चर्चा शुरू हो गई। इसी बीच कांग्रेस ने संगठन को एकजुट करना शुरू किया, कार्यकर्ताओं को जोड़ा और हिमाचल प्रदेश के बाद कर्नाटक में भी उसने सरकार बनाई।

हालांकि, यह काम आसान नहीं था। इसके लिए खुद राहुल गांधी को जमीन पर उतरना पड़ा, उन्हें 'अन्मैच्योर राहुल' से अपनी छवि को सुधार कर एक गंभीर नेता की बनानी पड़ी। कांग्रेस और राहुल गांधी में इस आमूलचूल परिवर्तन की तस्वीर को देश ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान देखा...जब कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक राहुल गांधी पैदल चले।

इसके बाद से राहुल गांधी कई मौकों पर लोगों को चौंका चुके हैं। कभी वह विदेशी दौरों के बीच देश में आलोचना के डर से बेखौफ सरकार की नीतियों पर खुलकर बोलते हैं तो कभी ड्राइवरों के साथ ट्रक की सवारी करते हैं। कभी दिल्ली में बाइक के गैराज में दिखते हैं तो कभी मुखर्जी नगर इलाके में स्टूडेंट्स के साथ चर्चा करते हैं। अब राहुल गांधी सोनीपथ में एक खेत में दिखाई दिए। यहां उन्होंने न सिर्फ किसानों से बातचीत की बल्कि ट्रैक्टर भी चलाया और धान की रोपाई भी की। ऐसे में चर्चा करते हैं राहुल गांधी में हुए इस सियासी ट्रांसफार्मेशन की। कैसे राहुल गांधी अपनी तस्वीर को बदलने की कोशिश कर रहे हैं? वह कब-कब लोगों को चौंका चुके हैं और इन सबके सियासी मायने क्या हैं?

शुरुआत भारत जोड़ो यात्रा से

राहुल गांधी की छवि को बदलने का पहला प्रयास भारत जोड़ो यात्रा से हुआ। कांग्रेस ने सात सितंबर 2022 को इस देशव्यापी यात्रा को लॉन्च किया। कन्याकुमारी से होते हुए यह यात्रा केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान दिल्ली और कन्याकुमारी पहुंची। इस दौरान राहुल गांधी की दाढ़ी काफी चर्चा में रही। 30 जनवरी 2023 को यह यात्रा समाप्त हुई।

ट्रक वाया गैराज

बीते महीने जून में राहुल गांधी की एक तस्वीर सामने आई। वह अमेरिका में ट्रक ड्राइवरों के साथ सवारी करते नजर आए। कांग्रेस के ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किए गए वीडियो में राहुल ड्राइवरों के साथ बातचीत भी करते नजर आए। ऐसा ही एक नजारा दिल्ली से सामने आया, जब करोल बाग एरिया में राहुल गांधी एक बाइक के गैराज में दिखे। इस दौरान वह पेचकस लिए बाइक ठीक करते हुए दिखे। सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें काफी वायरल हुई थीं।

जब स्टूडेंट्स के बीच पहुंचे राहुल

राहुल गांधी की मुखर्जी नगर इलाके में स्टूडेंट्स के साथ बातचीत करते भी नजर आए थे। इसके अलावा दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में स्टूडेंट्स के साथ लंच करते हुए उनकी तस्वीरें भी काफी चर्चा का केंद्र बनी हुई थीं।

अब खेत में कांग्रेस के युवराज

आज (शनिवार) को भी राहुल गांधी की तस्वीरें वायरल हुईं। इसमें राहुल गांधी सोनीपत के एक गांव में खेतों में नजर आ रहे हैं। वह किसानों के साथ न सिर्फ बातचीत करते दिखे, बल्कि उन्होंने ट्रैक्टर भी चलाया और धान भी रोपा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकर्जुन खड़गे ने इन तस्वीरों को पोस्ट करते हुए लिखा है- हमारा अभिमान, भारत के किसान। आज हरियाणा के सोनीपत में हमारे अन्नदाता किसानों व मेहनतकश खेत-मज़दूरों से राहुल गांधी ने संवाद किया। ये कांग्रेस पार्टी की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

इन तस्वीरों के सियासी मायने

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस और राहुल गांधी की इन तस्वीरों में 2024 के लोकसभा चुनाव और आगामी राज्यों के विधानसभा चुनाव छिपे हैं। लोकसभा चुनाव के अलावा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी चुनाव होने हैं। यहां कांग्रेस सत्ता हासिल करने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रही है। साथ ही लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी की छवि को भी बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हें एक गंभीर, जननायक और संवेदनशील नेता के तौर पर पेश किया जा रहा है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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