Delhi Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी (PG) की इमारत ढहने के दर्दनाक हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस त्रासदी के बाद प्रशासन की जवाबदेही और अवैध निर्माण को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और युवा नेता श्रीनिवास बीवी ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन और भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद भी प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि मलबे में कितने छात्र फंसे हो सकते हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि इलाके में चल रहे अवैध पीजी, उनके नक्शे और फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट को मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कब कार्रवाई होगी।
कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि पिछले तीन-चार सालों से दिल्ली में लगातार ऐसे दिल दहला देने वाले हादसे सामने आ रहे हैं, लेकिन कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि इन अवैध पीजी को कौन चला रहा था, इनके बिल्डिंग मैप किसने पास किए और बिना सुरक्षा जांच के फायर एनओसी किसने जारी की। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई (NSUI) और कांग्रेस कार्यकर्ता छात्रों के अधिकार और सुरक्षा की लड़ाई में पूरी मजबूती से उनके साथ खड़े हैं।
रेस्क्यू में 2 घंटे की देरी और भ्रष्टाचार के आरोप
कांग्रेस नेता श्रीनिवास बीवी ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन को घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति संभालने में करीब दो घंटे लग गए, जिससे बचाव अभियान में काफी देरी हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना मानकों और नियमों की परवाह किए केवल भ्रष्टाचार और कमीशन के दम पर ऐसी खतरनाक इमारतों को मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कैंपस के पास छात्रों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित हॉस्टल होने चाहिए थे, लेकिन सरकार छात्रों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह विफल साबित हुई है।
एनडीआरएफ के नेतृत्व में चल रहा रेस्क्यू - पुलिस
दक्षिण-पश्चिम जिले के एडिशनल डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि पुलिस को दोपहर करीब 1:30 बजे पीसीआर कॉल के माध्यम से इमारत गिरने की सूचना मिली थी। साउथ कैंपस थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तुरंत कुछ छात्रों को सुरक्षित रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया। मलबे में अन्य छात्रों के दबे होने की पुष्टि के बाद एनडीआरएफ (NDRF), कैट्स (CATS) एम्बुलेंस और अन्य राहत टीमों को मौके पर बुलाया गया। फिलहाल एनडीआरएफ की अगुवाई में भारी मलबे को हटाने और बाकी लोगों को सुरक्षित निकालने का काम लगातार जारी है।
