देश

तल्ख तेवर, तीखे वार और नपे-तुले शब्द...शॉर्ट स्पीच में राहुल कर गए बड़ी चोट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 9, 2023, 03:16 PM IST

Rahul Gandhi Speech: चिर-परिचित अंदाज से राहुल गांधी आज कुछ अलग नजर आए। उनके वार पहले से ज्यादा तीखे और स्पष्ट थे। तेवर बिल्कुल तल्ख थे। कम शब्दों में राहुल ने मणिपुर हिंसा से लेकर भारत जोड़ो यात्रा के अनुभवों की तस्वीर पेश की। आज राहुल गांधी का आत्मविश्वास भी सातवें आसमान पर नजर आया।

Image

संसद में राहुल गांधी

Photo : ANI

Rahul Gandhi Speech: लोकसभा की सदस्यता बहाल होने के बाद से पूरे देश की नजरें राहुल गांधी पर टिकी थीं। कब राहुल गांधी संसद के पटल पर भाषण देंगे? अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ वे क्या-क्या बोलेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को कैसे घेरेंगे...यह हर कोई देखना और सुनना चाहता था। लिहाजा वह घड़ी आज आ ही गई। सदस्यता बहाली के बाद पहली बार राहुल गांधी ने आज यानी बुधवार को लोकसभा में अपना भाषण दिया।

अपने चिर-परिचित अंदाज से राहुल गांधी आज कुछ अलग नजर आए। उनके वार पहले से ज्यादा तीखे और स्पष्ट थे। तेवर बिल्कुल तल्ख थे। कम शब्दों में राहुल ने मणिपुर हिंसा से लेकर भारत जोड़ो यात्रा के अनुभवों की जो तस्वीर पेश की, उस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने खूब हो-हल्ला भी किया। हालांकि, उन्होंने कम शब्दों में ही सत्ता पक्ष पर गहरी चोट कर दी।

पहले से ज्यादा कॉन्फिडेंट

भारत जोड़ो यात्रा और तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत के बाद से राहुल गांधी पहले से ज्यादा कॉन्फिडेंट नजर आ रहे हैं। सदन के बाहर तो वे केंद्र सरकार पर जोरदार हमला कर ही रहे थे, लेकिन सदस्यता बहाली के बाद उनका आत्मविश्वास सातवें आसमान पर नजर आया। आज संसद में भाषण देते समय भी उनकी बॉडी लैंग्वेज अलग थी। संसद में हो हल्ले के बीच उन्होंने जहां अपने भाषण की शुरुआत लोकसभा स्पीकर से माफी मांगने से शुरू की। राहुल गांधी ने कहा, पिछली बार मैंने अडाणी के ऊपर बोला था तो लोगों को कष्ट हुआ था, मैं उसके लिए माफी मांगता हूं, लेकिन मैंने एक सच्चाई रखी थी। आपको अब डरने की जरूरत नहीं है। आज मेरा भाषण अडानी पर नहीं है। आप रिलैक्स रह सकते हैं। आज स्पीच का डायरेक्शन दूसरी ओर है।

भाजपा के हथियार से भाजपा पर वार

राहुल गांधी के तेवर आज तल्ख रहे और उनके वार भी पहले से ज्यादा तीखे थे। राहुल ने इधर-उधर की बता न करते हुए अपने भाषण को पूरी तरह भारत जोड़ो यात्रा और मणिपुर हिंसा पर केंद्रित किया। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रवाद के हथियार को भाजपा पर ही चलाया। राहुल ने कहा, मणिपुर को आपने दो हिस्सों में बांट दिया है। उसके टुकड़े कर दिए हैं। मणिपुर में आपने हिंदुस्तान की हत्या की है। आपने वहां भारत माता की हत्या की है। एक मेरी मां संसद में बैठी है और दूसरी मां को आपने मणिपुर में मार दिया है। आप भारत माता के रखवाले नहीं हो। आप देशद्रोही हो, देशभक्त नहीं हो।

शॉर्ट स्पीच और गहरी चोट

राहुल गांधी ने हर बार की तरह इस बार संसद में कोई बड़ा भाषण नहीं दिया। उनका भाषण बहुत ही छोटा था। 20 मिनट के भाषण को उन्होंने ज्वलंत मुद्दों पर केंद्रित किया। उन्होंने अमित शाह और गौतम अडानी की तुलना मेघनाथ और कुंभकरण से करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला भी किया। राहुल गांधी ने कहा, हिंदुस्तान की सेना मणिपुर में एक दिन में शांति ला सकती है, लेकिन आप उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हो, क्योंकि आप मणिपुर में भारत माता को मारना चाहते हैं। उन्होंने कहा, आप पूरे देश में केरोसीन फेंक रहे हो। चिंगारी लगा रहे हो। मणिपुर के बाद आपने हरियाणा में भी केरोसीन फेंका है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article
Subscribe to our daily Newsletter!