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IAS पूजा खेडकर का अब निकलेगा रौब, पुलिस ने उठाई 'लाल बत्ती' वाली ऑडी कार

IAS Pooja Khedkar: IAS अधिकारी पूजा खेडकर ऑडी कार में लाल और नीली बत्ती लगाकर घूमती दिखीं थीं। इसके बाद महाराष्ट्र सरकार के चिह्न के साथ लाल बत्ती के अनधिकृत उपयोग को लेकर मामला दर्ज किया गया है। अब पूजा खेडकर द्वारा इस्तेमाल की गई ऑडी कार को यातायात विभाग के चतुरशृंगी पुलिस स्टेशन लाया गया है। इसे आगे की जांच और दस्तावेज़ सत्यापन के लिए यहां लाया गया है।

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IAS Pooja Khedkar

Photo : Twitter

IAS Pooja Khedkar: महाराष्ट्र कैडर की प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पुणे पुलिस ने उनकी कार को जब्त कर लिया है। जानकारी के मुताबिक, पूजा खेडकर द्वारा इस्तेमाल की गई ऑडी कार को यातायात विभाग के चतुरशृंगी पुलिस स्टेशन लाया गया है। इसे आगे की जांच और दस्तावेज़ सत्यापन के लिए यहां लाया गया है। बता दें, पुणे में तैनाती के दौरान पूजा खेडकर इसी कारण में लाल और नीली बत्ती लगाकर घूमती दिखीं थीं।

इससे पहले पूजा खेडकर को झटका देते हुए पुणे शहर की यातायात पुलिस ने बीते गुरुवार को एक निजी कंपनी को नोटिस जारी किया, जिसमें आईएएस प्रशिक्षु पूजा खेडकर द्वारा एक निजी कार पर महाराष्ट्र सरकार के चिह्न के साथ लाल बत्ती के अनधिकृत उपयोग को लेकर मामला दर्ज किया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि यह लग्जरी कार एक निजी कंपनी की है। थर्मो वेरिटा इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया गया है कि वह कार को आगे की जांच के लिए नजदीकी पुलिस थाने में लेकर आये। ऐसा न करने पर पुणे पुलिस कानूनी कार्रवाई करेगी। पुणे क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने एक निजी कंपनी को नोटिस जारी किया था, जो खेडकर द्वारा इस्तेमाल की गई ऑडी कार का पंजीकृत मालिक है।

अवैध निर्माण का भी नोटिस

पुणे नगर निगम ने विवादों में आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर की मां मनोरमा खेडकर को एक नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर उनके बंगले की चारदीवारी के पास बने अनधिकृत ढांचे को हटाने का शनिवार को निर्देश दिया। पुलिस ने आईएएस प्रशिक्षु पूजा के माता-पिता मनोरमा और दिलीप खेडकर के अलावा पांच अन्य के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है। कुछ दिन पहले ही एक वीडियो सामने आया था जिसमें मनोरमा भूमि विवाद को लेकर कुछ लोगों को कथित तौर पर बंदूक से धमकाती नजर आ रही थीं।

पूजा खेडकर पर ये हैं आरोप

वर्ष 2023 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी खेडकर परिवीक्षाधीन हैं और वर्तमान में अपने गृह कैडर महाराष्ट्र में तैनात हैं। खेडकर (34) पर भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल होने के लिए शारीरिक दिव्यांगता श्रेणी और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कोटा के तहत लाभों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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