मुख्यमंत्री शिवराज ने 12 चीतों को कूनो नेशनल पार्क के क्वारंटीन बाड़ों में छोड़ दिया है इन चीतों को क्वारंटीन बाड़ों में एक महीना रखा जाएगा। इस दौरान इन्हें भैंसों का मांस खिलाया जाएगा। दक्षिण अफ्रीका से आए चीतों को रिलीज करने के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है गौर हो कि इससे पहले नामीबिया से आठ चीतों को लाया गया था।
इससे पहले ग्वालियर से उड़ान भरने के बाद अफ्रीकी चीतों को लेकर हेलीकॉप्टर कूनो नेशनल पार्क पहुंच गया है दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया, कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका से आए चीतों को रिलीज करते समय मीडिया को एंट्री नहीं दी गई है।
गौर हो कि मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के संरक्षण के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं इससे लिए प्रोजेक्ट चीता ( Project Cheetah) पर खासा ध्यान दिया जा रहा है और इस क्रम में हाल ही में नामीबिया से चीते आए थे वहीं अब इनका कुनबा और बढ़ रहा है, दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते (South Africa Cheetah) भारत के लिए रवाना हो गए थे और सी-17 विमान से शनिवार को यहां पहुंचे, इसके लिए खास इंतजाम किए गए हैं।
गौर हो कि इससे भारत में चीतों की समुचित संख्या सुनिश्चित करने में सहयोग देने के लिए दक्षिण अफ्रीका ने भारत के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे।
इस बारे में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि हमारे पारिस्थितिक संतुलन को बहाल करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में 12 चीतों को दक्षिण अफ्रीका से भारत लाया जा रहा है। भारतीय वायु सेना के गैलेक्सी ग्लोबमास्टर सी17 पर 12 चीतों को बीते दिन लादकर देश लाया जा रहा है।1952 में भारत सरकार ने चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया था।
12 चीतों में से सात नर और पांच मादा
भारतीय वायुसेना का सी-17 ग्लोबमास्टर मालवाहक विमान दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लेकर आ रहा है। ये सभी चीते आज भारत पहुंचेंगे, 12 चीतों में से सात नर और पांच मादा हैं। चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में रखा जाएगा।
सभी चीतों में रेडियो कॉलर लगाए गए हैं
चीतों को दक्षिण अफ्रीका से कूनो नेशनल पार्क लाने के बाद उनके सभी स्वास्थ्य की जांच की जाएगी और फिर उन्हें एक महीने के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगा वहीं सभी चीतों में रेडियो कॉलर लगाए गए हैं और सैटेलाइट से निगरानी की जा रही है। प्रत्येक चीते की 24 घंटे निगरानी भी की जाएगी।
यह परियोजना वानिकी विभाग, दक्षिण अफ्रीकी संगठनों, राष्ट्रीय जैव विविधता संस्थान, लुप्तप्राय वन्यजीव ट्रस्ट आदि द्वारा कार्यान्वित की जाती है।
भारत और दक्षिण अफ्रीका ने अफ्रीकी देश से चीतों के परिवहन और कूनो में उन्हें फिर से लाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
