Ganga Water Treaty : बांग्लादेश के साथ उतार-चढ़ाव वाले रिश्ते के बीच गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर बात की जा रही है। भारत और बांग्लादेश के बीच यह जल संधि 1996 में हुई। इसे फरक्का जल समझौता के नाम से भी जाना जाता है। दोनों देशों के लिए यह संधि काफी अहम है लेकिन भारत में इस संधि को लेकर विरोध के स्वर उभरने लगे हैं। एक तबका है जो यह कह रहा है कि सरकार को बांग्लादेश के साथ इस संधि का नवीनीकरण नहीं करना चाहिए। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह संधि 12 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रही है। इन सबके बीच संधि के नवीनीकरण पर पिछले दिनों भारत सरकार का बयान भी आया। अपने बयान में सरकार ने बीते 4 अगस्त को कहा कि संयुक्त नदी आयोग सहित भारत और बांग्लादेश के बीच जो भी मौजूदा द्विपक्षीय व्यवस्था है, उसके तहत ही गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर बातचीत होगी।
गंगा जल संधि के नवीनीकरण पर सरकार का रुख
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में जब इस संधि के नवीनीकरण के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर के कई ढांचे हैं जो दोनों तरफ जल से जुड़े मुद्दों का समर्थन करते हैं। जायसवाल ने कहा, 'भारत और बांग्लादेश के बीच 54 नदियां हैं और दोनों देश इन नदियों के जल को साझा करते हैं। इन नदियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए दोनों देशों के बीच एक द्विपक्षीय तंत्र 'संयुक्त नदी आयोग' मौजूद है। इसके अलावा तकनीकी स्तर पर भी कई व्यवस्थाएं हैं, जो जल संबंधी मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत को समर्थन देती हैं। गंगा जल संधि पर होने वाली कोई भी चर्चा भी हमारे मौजूदा द्विपक्षीय तंत्र के तहत ही की जाएगी।'
क्या है गंगा जल संधि?
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि पर 12 दिसंबर 1996 को हस्ताक्षर किए गए थे। यह संधि 30 वर्षों के लिए लागू की गई थी और दिसंबर 2026 में इसकी अवधि समाप्त हो रही है। हालांकि, दोनों देशों के बीच इसके नवीनीकरण को लेकर अभी तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है। सरकार ने बताया है कि पेयजल और औद्योगिक जल की जरूरतों को लेकर सभी संबंधित पक्षों, जिनमें पश्चिम बंगाल सरकार भी शामिल है, से सुझाव प्राप्त किए गए हैं। इन सुझावों को सरकार के रुख तय करने में शामिल किया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार के अधिकृत प्रतिनिधि ने 30 अक्टूबर 2023, 15 मार्च 2024, 31 मई 2024 और 26 मार्च 2025 को हुई अंतर-मंत्रालयी बैठकों में हिस्सा लिया, जहां इस मुद्दे पर सामूहिक दृष्टिकोण तैयार किया गया।
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क्यों की गई थी यह संधि?
भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद था। इस विवाद को समाप्त करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा और बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 12 दिसंबर 1996 को इस संधि पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते ने दोनों देशों के बीच 30 वर्षों के लिए गंगा जल बंटवारे का आधार तय किया।
जल बंटवारे का फार्मूला कैसे काम करता है?
संधि के अनुसार, 1 जनवरी से 31 मई तक के दौरान पश्चिम बंगाल स्थित फरक्का बैराज से बांग्लादेश के लिए न्यूनतम जल छोड़ने का प्रावधान है। यह व्यवस्था 1949 से 1988 के बीच गंगा के जल प्रवाह के आंकड़ों के आधार पर तय किए गए फार्मूले और संकेतात्मक कार्यक्रम पर आधारित है। यदि फरक्का पर जल प्रवाह 70,000 क्यूसेक से कम हो जाता है, तो भारत और बांग्लादेश को 50-50 प्रतिशत पानी मिलेगा। यदि जल प्रवाह इससे अधिक होता है, तो अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार पानी के बंटवारे का फार्मूला लागू होता है। अत्यधिक कम जल प्रवाह की स्थिति में दोनों देशों के बीच आपसी परामर्श का प्रावधान है। फरक्का पर हर 10 दिन में जल प्रवाह का आकलन किया जाता है। इसके अलावा, 11 मार्च से 10 मई के बीच तीन वैकल्पिक 10-10 दिन की अवधियों में भारत और बांग्लादेश दोनों को 35,000 क्यूसेक पानी की गारंटी दी गई है।
संधि को कैसे लागू किया जाता है?
इस संधि के क्रियान्वयन की निगरानी भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग के माध्यम से की जाती है। जल संबंधी सभी साझा मुद्दों पर दोनों देशों के बीच तकनीकी स्तर की नियमित बैठकें होती हैं। ये बैठकें जल प्रवाह के आंकड़ों के आदान-प्रदान और संयुक्त निगरानी के लिए एक संस्थागत मंच प्रदान करती हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच 54 साझा नदियां हैं। इनमें से सात नदियों को जल बंटवारे के समझौते के लिए प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया गया है। संयुक्त नदी आयोग (JRC) की स्थापना 1972 में दोनों देशों के बीच साझा, सीमा और अंतरराष्ट्रीय नदियों से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए एक द्विपक्षीय तंत्र के रूप में की गई थी।
Sanjay Jha
संधि को नवीनीकृत न करे सरकार: जद-यू
जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा ने गुरुवार को सरकार से बांग्लादेश के साथ हुए फरक्का जल संधि (गंगा जल संधि) को नवीनीकृत न करने का अनुरोध किया। राज्यसभा में इस संधि का जिक्र करते हुए झा ने गंगा बेसिन वाले सभी राज्यों की 2050 तक पानी की जरूरतों का एक सटीक एवं वैज्ञानिक आकलन के आधार पर एक नई जल व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव भी रखा। झा ने इसे 'राष्ट्रीय हित का मुद्दा’बताते हुए कहा कि संधि के बारे में कोई भी निर्णय लेने से पहले बिहार के हितों की पर्याप्त रूप से रक्षा की जानी चाहिए। झा ने कहा कि फरक्का बराज का निर्माण हुगली नदी में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित करने और कोलकाता बंदरगाह की जरूरतों के लिए किया गया था, लेकिन बिहार पिछले कई दशकों से गंगा जल की अपर्याप्त उपलब्धता से प्रभावित है। जद-यू सांसद ने कहा कि दक्षिण बिहार के कई जिलों के भूजल स्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे पेयजल, और सिंचाई के लिए पानी की कमी हो रही है। उन्होंने कहा कि 2050 तक बिहार को अतिरिक्त 2,000 क्यूसेक पानी की आवश्यकता होगी।
नवीनीकरण पर औपचारिक बातचीत शुरू करना चाहता है बांग्लादेश
गंगा जल संधि के भविष्य को लेकर बातचीत भारत और बांग्लादेश के संबंधों में नया कूटनीतिक मुद्दा बन गई है। ऐसे में बांग्लादेश ने इसके भविष्य पर विचार के लिए एक आंतरिक विशेषज्ञ समिति गठित की है और संधि के नवीनीकरण पर औपचारिक चर्चा शुरू करने का अनुरोध भारत को भेजा है। रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश ने 8 जून को भारत को बातचीत शुरू करने का अनुरोध भेजा था, लेकिन अभी तक उसे भारत की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं मिला है। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस विषय पर चर्चा संयुक्त नदी आयोग जैसे निर्धारित द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से होगी और दोनों देशों की पारस्परिक सुविधा के अनुसार उचित समय पर वार्ता आयोजित की जाएगी। रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत अभी इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहता। वह तमाम द्विपक्षीय एवं भारतीय हितों से जुड़े मुद्दों पर बांग्लादेश सरकार का रुख देखने के बाद ही इस मामले में आगे बढ़ने के बारे में निर्णय करेगा।
