कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी वाड्रा 26 सितंबर को बिहार में अपनी पहली चुनावी रैली करने जा रही हैं। यह रैली मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) के गांधी मैदान में होगी, जो न केवल एनडीए का मज़बूत गढ़ माना जाता है बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के चंपारण सत्याग्रह की ऐतिहासिक भूमि भी है।
प्रियंका गांधी अपनी तेज़-तर्रार राजनीतिक शैली और भीड़ खींचने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं। कांग्रेस को उम्मीद है कि उनकी मौजूदगी चुनावी लड़ाई को नया उत्साह और धार देगी।
प्रियंका पटना में महिला कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी और जीविका समूहों से भी संवाद करेंगी। उनकी यह एंट्री 24 सितंबर को होने वाली सीडब्ल्यूसी बैठक के तुरंत बाद हो रही है, जिसमें चुनावी रणनीति, सीट बंटवारे और ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर चर्चा होगी। राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से मिले उत्साह को बनाए रखने और महिलाओं व वंचित वर्ग तक पहुँच बनाने के लिए प्रियंका की रैली कांग्रेस का बड़ा दांव मानी जा रही है।
रणनीति और प्रतीक
मोतिहारी से प्रचार की शुरुआत कांग्रेस के लिए सिर्फ़ एक चुनावी रैली नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी है। महात्मा गांधी के सत्याग्रह की धरती से प्रियंका गांधी का अभियान आरंभ करना कांग्रेस के लिए प्रतीकात्मक ताक़त साबित हो सकता है।
महिला कार्यकर्ताओं से संवाद
पटना में प्रियंका गांधी महिला कार्यकर्ताओं से भी मुलाक़ात करेंगी। ‘हर घर अधिकार यात्रा’ के तहत वे आंगनबाड़ी और जीविका कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगी, जिससे महिलाओं के बीच कांग्रेस की पकड़ मज़बूत बनाने की कोशिश होगी।
सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद बड़ा शो
इस रैली से दो दिन पहले, 24 सितंबर को, कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक पटना में होगी। इस बैठक में सीट बंटवारे, ‘वोट चोरी’ जैसे आरोपों और महागठबंधन की रणनीति पर मंथन होगा।
नवंबर चुनाव से पहले कांग्रेस का दांव
बिहार में विधानसभा चुनाव नवंबर में होने की संभावना है। राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बाद अब प्रियंका गांधी की एंट्री कांग्रेस के लिए मोमेंटम बनाए रखने और महिला वंचित वर्ग तक पहुँचने की बड़ी कोशिश है।
कांग्रेस का संदेश
प्रियंका गांधी की मोतिहारी रैली यह दर्शाती है कि कांग्रेस अब एनडीए को उसके गढ़ में चुनौती देने और चंपारण की ऐतिहासिक धरोहर को चुनावी राजनीति से जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
