President rule imposed in Manipur: मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लग गया है, बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद से पिछले सप्ताह दिया था इस्तीफा उसके बाद ये बड़ा घटनाक्रम सामने आया है बता दें कि राज्य के सीएम रहे बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राज्य में नए मुख्यमंत्री का नाम अभी तक सामने नहीं आया था। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा करते हुए गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मानना है कि 'ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें इस राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चल सकती।'
अधिसूचना में कहा गया है, 'अब, संविधान के अनुच्छेद 356 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मैं घोषणा करती हूं कि मैं भारत के राष्ट्रपति के रूप में मणिपुर राज्य सरकार के सभी कार्यों और इस राज्य के राज्यपाल द्वारा निहित या प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियों को अपने अधीन करती हूं।'अधिसूचना में कहा गया है कि विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है।
हिंसा में 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है
गौर हो कि मणिपुर में साल 2023 मई से अब तक दो समुदायों मैतेई और कुकी समुदाय के बीच टकराव के बाद बड़े पैमाने पर भयंकर हिंसा हुई है, इस हिंसा में 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दिया था
ध्यान रहे कि राज्य के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दिया था, जिसके बाद राज्यपाल अजय भल्ला ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की वहीं गुरूवार को ही मणिपुर गवर्नर अजय कुमार भल्ला और अर्धसैनिक बल के अधिकारियों ने राजभवन में बैठक की थी।
बता दें कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले बीरेन सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी, बीरेन सिंह को राज्य में जातीय संघर्ष से निपटने के तरीके को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है, वहीं बीजेपी के पूर्वोत्तर प्रभारी और सांसद संबित पात्रा मणिपुर दौरे पर हैं।
जातीय हिंसा के चलते विवादों में घिरा रहा मणिपुर CM बीरेन सिंह का कार्यकाल
मणिपुर के मुख्यमंत्री के रूप में नोंगथोम्बम बीरेन सिंह का कार्यकाल मुख्य रूप से जातीय हिंसा से निपटने, संघर्ष भड़काने के आरोपों समेत कई विवादों से घिरा रहा। फुटबॉल खिलाड़ी रहे सिंह राजनीति में प्रवेश करने से पहले पत्रकार थे। वह पहली बार 2017 में मुख्यमंत्री बने। उनका दूसरा कार्यकाल 2022 में शुरू हुआ। वह इंफाल ईस्ट जिले में हीनगांग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।सिंह ने 2002 में राजनीति में प्रवेश किया, जब वह डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपुल्स पार्टी में शामिल हुए और विधानसभा चुनाव जीते। वह 2003 में कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए 2007 में सीट बरकरार रखी।
...जब बीरेन सिंह से संबंधित ऑडियो टेप लीक हो गएफरवरी में, एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब सिंह से संबंधित ऑडियो टेप लीक हो गए, जिसमें उन्हें कथित तौर पर यह चर्चा करते हुए सुना गया कि किस प्रकार कथित रूप से उनकी मंजूरी से जातीय हिंसा भड़काई गई। जातीय संघर्ष से निपटने में सिंह के रवैये की मुखर आलोचक ‘कुकी ऑर्गेनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट’ (कोहूर) ने ऑडियो टेप की प्रामाणिकता की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग की। मामले में उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) को टेप की प्रामाणिकता की पुष्टि करने और एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
