अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी पर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि चंपत राय की ईमानदारी पर शक नहीं किया जा सकता है। उन्होंने ट्रस्ट में प्रशासनिक सुधारों की वकालत भी की। उन्होंने कहा कि एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में संदिग्ध गतिविधियों का शक है और मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
'टाइम्स ऑफ इंडिया' से बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें इस गड़बड़ी में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा या गोपाल राव जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों की संलिप्तता का संदेह है? इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने दोटूक कहा कि राम मंदिर आंदोलन से दशकों पुराने जुड़ाव को देखते हुए चंपत राय की ईमानदारी पर कभी सवाल नहीं उठाया जा सकता। हालांकि, उन्होंने इसके आगे जोड़ते हुए कहा, "लेकिन मैं दूसरों (अन्य वरिष्ठ सदस्यों) के लिए ऐसी गारंटी नहीं दे सकता।"
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी गई जानकारी
नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को अवगत करा दिया गया है। पीएम मोदी खुद इस पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर रख रहे हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि यह मौजूदा व्यवस्था की खामी का मामला है, जिसे पूरी तरह पारदर्शी और कमियों से मुक्त बनाने की सख्त जरूरत है।
कैश काउंटिंग रूम की 'संदिग्ध' हरकतें
आरोपों की गंभीरता पर बात करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि डोनेशन रूम के सीसीटीवी फुटेज 45 दिनों के बाद स्वतः डिलीट हो जाते हैं। इसके बावजूद, शुरुआती जांच में कुछ बेहद 'संदिग्ध' गतिविधियां सामने आई हैं। फुटेज में देखा गया है कि कैश के बंडलों को तय काउंटर पर जमा करने के बजाय सीधे कुछ खास व्यक्तियों के हाथों में सौंपा जा रहा था।
उन्होंने अंदेशा जताया कि वीडियो के आधार पर कुछ छोटे कर्मचारियों की पहचान तो हो सकती है, लेकिन इसमें दूसरों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
SBI पर भी उठाए सवाल
नृपेंद्र मिश्रा ने इस पूरे मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की कार्यप्रणाली पर भी तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मंदिर के दान को संभालने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी एसबीआई की थी, लेकिन बैंक ने अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई। यह बेहद हैरान करने वाला है कि नोटों की गिनती का पूरा जिम्मा आउटसोर्स किए गए 44 कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया था।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि बैंक के साथ हुए समझौते में साफ नियम तय थे। इसमें यह भी नियम शामिल था कि नोट गिनने वाले कर्मचारियों के कपड़ों में कोई पॉकेट नहीं होनी चाहिए, लेकिन इन प्रोटोकॉल्स का पालन नहीं किया गया।
प्रशासनिक सुधार की मांग
इस विवाद को बेहद 'परेशान करने वाला' बताते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर परिसर के संचालन के लिए एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या प्रशासक नियुक्त करने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने कहा कि आज इस पूरे परिसर का प्रबंधन किसी छोटे जिले को संभालने जैसा हो चुका है। इसलिए ट्रस्ट के अधीन एक वरिष्ठ और अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी को इसका सीईओ बनाया जाना चाहिए, जिसके पास दैनिक प्रबंधन के फैसले लेने के लिए पर्याप्त स्वायत्तता हो।
SIT की जांच जारी
राम मंदिर में दान के कथित गबन की पड़ताल कर रही एसआईटी ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से दान राशि की गिनती और इस प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों की नियुक्ति के सिलसिले में पूछताछ की है। इसके अलावा ट्रस्ट के कई और सदस्यों से पूछताछ की गई है। SIT चंपत राय से भी पूछताछ कर चुकी है।
