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नीतीश से इतना क्यों बिफरे प्रशांत किशोर? PM Modi के पैर छूने पर बोले- '13 करोड़ लोगों के नेता ने बिहार की इज्जत बेच दी'

Prashant Kishor on Nitish Kumar: प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार ने राजग को समर्थन देने के एवज में बिहार के बच्चों के लिए रोजगार, विशेष राज्य का दर्जा नहीं मांगा, बल्कि नीतीश कुमार ने मांग रखी कि 2025 के बाद भी वह मुख्यमंत्री बने रहें और इसके लिए भाजपा भी समर्थन कर दे। बिहार के सभी लोगों की इज्जत उन्होंने बेच दी।

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प्रशांत किशोर

Prashant Kishor on Nitish Kumar: एनडीए संसदीय दल की बैठक के दौरान नीतीश कुमार का पीएम मोदी के पैर छूने पर दिल्ली से लेकर बिहार तक बवाल मचा हुआ है। विपक्ष तो इसको लेकर नीतीश कुमार को निशाना बना ही रहा है। अब राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की आलोचना की है। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने सत्ता में बने रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पैर छुए।

अपने जन सुराज अभियान के तहत एक सभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, कि देश ने कुछ दिन पहले देखा होगा कि मीडिया के लोग कह रहे थे कि नीतीश कुमार के हाथ में भारत सरकार की कमान है। नीतीश कुमार अगर न चाहें तो देश में सरकार नहीं बनेगी। इतनी ताकत है नीतीश कुमार के हाथ में। उन्होंने कहा, नीतीश कुमार ने इसके एवज में क्या मांगा? बिहार के बच्चों के लिए रोजगार नहीं मांगा। बिहार के जिलों में चीनी की फैक्टरियां चालू हो जाएं-यह नहीं मांगा। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिल जाए -यह नहीं मांगा। बिहार के लोग सोच रहे होंगे कि तो फिर उन्होंने क्या मांगा? नीतीश कुमार ने मांग रखी कि 2025 के बाद भी वह मुख्यमंत्री बने रहें और इसके लिए भाजपा भी समर्थन कर दे। बिहार के सभी लोगों की इज्जत उन्होंने बेच दी।

बिहार का अभिमान झुक गया

प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार पर अपना प्रहार जारी रखते हुए कहा कि 13 करोड़ लोगों के जो नेता हैं, हम लोगों का अभिमान हैं, सम्मान हैं, वह पूरे देश के सामने झुक कर मुख्यमंत्री बने रहने के लिए पैर छू रहे हैं। दरअलस, जन सुराज अभियान की शुरूआत करने से पहले नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रह चुके किशोर पिछले सप्ताह नयी दिल्ली में राजग की एक बैठक में मोदी को राजग का नेता घोषित किए जाने के बाद नीतीश द्वारा किये गये व्यवहार को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप की ओर इशारा कर रहे थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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