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'PM Modi आएं और हमें आजादी दिलाएं...'POK में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन तेज, कश्मीरी एक्टिविस्ट ने भारत से मांगी मदद

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 11, 2023, 08:09 PM IST

Pakistan occupied Kashmir: शब्बीर चौधरी ने कहा, पीओके के लोग पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्ति चाहते हैं, इसके लिए वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगा रहे हैं। एलओसी के पास लोगों को नारे लगाते हुए सुना गया कि पीएम मोदी यहां आएं और हमें पाकिस्तान से आजादी दिलाएं।

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पीएम मोदी

Photo : BCCL

Pakistan occupied Kashmir: पाकिस्तान में सियासी उथल-पुथल और गर्त में जाती अर्थव्यवस्था का असर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) पर भी हो रहा है। यहां महंगाई चरम पर है। रोजमर्रा की जरूरत के सामान के दाम आसमान छू रहे हैं और आम जनता भूख से बेहाल है। ऐसे में लोग पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं और यहां पर बड़े पैमाने पर पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

इस बीच एक कश्मीरी एक्टिविस्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगाई है। शब्बीर चौधरी नाम के एक्टिविस्ट ने वीडियो जारी कर इन हालातों के लिए पाकिस्तानी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, पीओके में लोग उच्च मुद्रास्फीति, खाद्य असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं ।

पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्ति दिलाएं पीएम मोदी

शब्बीर चौधरी ने कहा, पीओके के लोग पाकिस्तान के अवैध कब्जे से मुक्ति चाहते हैं, इसके लिए वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने कहा, पीओके में नियंत्रण रेखा एलओसी के पास लोगों ने पीएम मोदी से मदद की गुहार करते हुए नारे लगाए। उन्होंने कहा, लोग पीएम मोदी से कह रहे हैं कि 'हमें पाकिस्तान से आजादी दिलाओ और भुखमरी से हमें बचाओ।'

जानवरों की तरह व्यवहार कर रही पाकिस्तान सरकार

कश्मीर एक्टिविस्ट ने कहा, नकदी संकट से जूझ रहे पाकिस्तान में बिजली के लिए हाहाकार बचा हुआ है। उन्होंने बताया, पीओके के लोगों से बिजली की अधिक कीमत वसूली जाती है। इतना ही नहीं पीओके और गिलगित बाल्टिस्तान के निवासियों के दोयम दर्ज का व्यवहार किया जाता है। यहां लोगों को आटे और अन्य जरूरी सामान के लिए भारी टैक्स चुकाना पड़ रहा है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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