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पीएम मोदी करेंगे 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर का दौरा, कहा- यह विदेशी आक्रमणकारियों...

सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमले हुए और उसे लूटा गया, जिसमें 1024 ईस्वी में तुर्क शासक महमूद गजनवी द्वारा किया गया हमला भी शामिल है। मोदी ने याद दिलाया कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मोदी ने कहा है कि विदेशी आक्रमणकारियों के कई हमलों के बाद पुनर्निर्मित किया गया यह मंदिर भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना का प्रतीक है।

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पीएम मोदी करेंगे 11 जनवरी को करेंगे सोमनाथ मंदिर का दौरा

PM Modi Somnath Mandir Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के सोमनाथ मंदिर का 11 जनवरी को दौरा करेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर सोमनाथ में वर्षभर गतिविधियां आयोजित किए जाने की योजना बनाई गई है। उन्होंने बताया कि आठ से 11 जनवरी तक सोमनाथ में अनेक आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियां होंगी।

'विदेशी आक्रमणकारियों के कई हमलों...'

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि विदेशी आक्रमणकारियों के कई हमलों के बाद पुनर्निर्मित किया गया यह मंदिर भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना का प्रतीक है। सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के 1,000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिखे एक ‘ब्लॉग पोस्ट’ में प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमारी सभ्यता की अदम्य भावना का सोमनाथ से बेहतर उदाहरण कोई नहीं हो सकता। यह मंदिर बाधाओं और संघर्षों को पार करते हुए गौरव के साथ खड़ा है।'

मोदी ने लिखा ब्लॉग

मोदी ने विदेशी आक्रमणकारियों के बार-बार हमलों के बाद पुनर्निर्मित किए गए सोमनाथ मंदिर की सराहना करते हुए सोमवार को कहा कि गुजरात स्थित यह मंदिर भारतीय सभ्यता की अदम्य भावना का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1,000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक ‘ब्लॉग पोस्ट’ में कहा, 'हमारी सभ्यता की अदम्य भावना का सोमनाथ से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता। यह मंदिर बाधाओं एवं संघर्षों पर विजय प्राप्त करते हुए गौरव के साथ खड़ा है।'

नेहरू पर हमला

प्रधानमंत्री ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि नेहरू 1951 में मंदिर के उद्घाटन से 'अधिक उत्साहित नहीं' थे।

मोदी ने कहा कि 2026 सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने का गवाह है और इसके बाद हुए बार-बार के हमलों के बावजूद यह मंदिर आज भी गर्व से खड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'ऐसा इसलिए है क्योंकि सोमनाथ की गाथा भारत माता की उन अनगिनत संतानों के अटूट साहस की कहानी है, जिन्होंने हमारी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की।'

उन्होंने कहा कि यही भावना आज राष्ट्र में भी दिखाई दे रही है, जो सदियों के आक्रमणों और औपनिवेशिक लूट से उबरकर वैश्विक विकास के सबसे चमकते केंद्रों में से एक बनकर उभरा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमारे मूल्यों और हमारे लोगों के संकल्प की वजह से आज भारत पर दुनिया की नजर है। दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है। वह हमारे नवोन्मेषी युवाओं में निवेश करना चाहती है।'

उन्होंने कहा, 'हमारी कला, हमारी संस्कृति, हमारा संगीत और हमारे अनेक पर्व आज वैश्विक पहचान बना रहे हैं। योग और आयुर्वेद जैसे विषय पूरी दुनिया में प्रभाव डाल रहे हैं। ये स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दे रहे हैं। आज कई वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत के आक्रमणकारी आज समय की धूल बन चुके हैं। उनका नाम अब विनाश के प्रतीक के तौर पर लिया जाता है।

उन्होंने कहा, 'इतिहास के पन्नों में वे केवल ‘फुटनोट’ हैं, जबकि सोमनाथ आज भी अपनी आशा बिखेरता हुआ प्रकाशमान खड़ा है। सोमनाथ हमें यह बताता है कि घृणा और कट्टरता में विनाश की विकृत ताकत हो सकती है, लेकिन आस्था में सृजन की शक्ति होती है।'

मोदी ने कहा कि अगर हजार साल पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर अपने पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है तो 'हम हजार साल पहले का समृद्ध भारत भी बना सकते हैं। आइए, इसी प्रेरणा के साथ हम आगे बढ़ते हैं। एक नए संकल्प के साथ, एक विकसित भारत के निर्माण के लिए। एक ऐसा भारत, जिसका सभ्यतागत ज्ञान हमें विश्व कल्याण के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।'

तुर्क शासक महमूद गजनवी का हमला

सोमनाथ मंदिर पर कई बार हमले हुए और उसे लूटा गया, जिसमें 1024 ईस्वी में तुर्क शासक महमूद गजनवी द्वारा किया गया हमला भी शामिल है। मोदी ने याद दिलाया कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, '1947 में दीवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने उसी समय घोषणा की कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल मंदिर का उद्घाटन देखने के लिए जीवित नहीं थे लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था। मोदी ने कहा, 'तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वह नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया।'

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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