Nandigram By Election: नंदीग्राम उपचुनाव में मतदान से ठीक 6 दिन पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को जमानत मिल गई है। मिलन प्रधान को तब गिरफ्तार किया गया था, जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस को इस सीट पर सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया था। ममता बनर्जी की पार्टी की उम्मीदवार पहले ही अपना नाम वापस ले चुकी थी। मिलन प्रधान को अब कोर्ट ने तीन हफ्ते के लिए अंतरिम राहत मिली है। यह सीट मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के इस्तीफे से खाली हुई थी, जिन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया। उन्होंने इस साल की शुरुआत में हुए राज्य चुनावों में भवानीपुर सीट भी जीती थी। उपचुनाव के लिए प्रचार 4 अक्टूबर को खत्म होगा और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी।
नंदीग्राम उम्मीदवार को 20 अक्टूबर तक राहत
कोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार को 20 अक्टूबर तक राहत दी है, जिससे उन्हें नंदीग्राम विधानसभा सीट के लिए 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार करने की इजाजत मिल गई है। अंतरिम राहत देते हुए जस्टिस तीर्थंकर घोष ने प्रधान को 21 अक्टूबर को ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट के जज ने प्रधान को उन छह आपराधिक मामलों में से हर एक के लिए 20,000 रुपये का जमानत बॉन्ड जमा करने का भी निर्देश दिया, जिनमें उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
नंदीग्राम आंदोलन के समय केस हुआ था दर्ज
हत्या, हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन जैसे आरोपों वाले ये सभी आपराधिक मामले 2007 में नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान प्रधान के खिलाफ दर्ज किए गए थे।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत मिलने पर पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा, "...जैसे ही मिलन प्रधान कांग्रेस के उम्मीदवार बने, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इतने समय तक यह मामला कहां था? ...मिलन प्रधान कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं...देश भर में राहुल गांधी का इतना डर है कि उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और सरकार ने उनकी जमानत रोकने की कोशिश में लाखों रुपये खर्च किए...अब वह चुनाव प्रचार कर पाएंगे; हालांकि समय कम है...नंदीग्राम और रेजीनगर में वोटिंग निष्पक्ष और बिना किसी डर के होगी, और मिलन प्रधान को कोई नहीं हरा सकता..."
