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झांसी मेडिकल कॉलेज में 10 बच्चों की मौत पर पीएम मोदी ने जताया दुख, राष्ट्रपति का भी आया बयान

Jhansi Medical College Fire: झांसी मेडिकल कॉलेज में आग की घटना में 10 बच्चों की मौत हो गई और 16 गंभीर रूप से झुलस गए। एनआईसीयू में जिस समय आग लगी, उस समय करीब 57 बच्चे भर्ती थे। प्रधानमंत्री मोदी व राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हादसे पर दुख व्यक्त किया है।

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झांसी की घटना पर पीएम मोदी ने जताया दुख।

Jhansi Medical College Fire: उत्तर प्रदेश के झांसी मेडिकल कॉलेज में आग लगने से 10 बच्चों की मौत पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। राष्ट्रपति मुर्मू ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हुए हादसे में कई नवजात शिशुओं की मौत की खबर बेहद दुखद है। ईश्वर शोक संतप्त माता-पिता और परिवारों को इस क्रूर आघात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। मैं घायल नवजात शिशुओं के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी झांसी मेडिकल कॉलेज में बच्चों के वार्ड में आग लगने से 10 शिशुओं की मौत पर दुख व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रधानमंत्री मोदी के हवाले से सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, हृदयविदारक! उत्तर प्रदेश में झांसी के मेडिकल कॉलेज में आग लगने से हुआ हादसा मन को व्यथित करने वाला है। इसमें जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी गहरी शोक-संवेदनाएं हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें इस अपार दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे। राज्य सरकार की देखरेख में स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव के हरसंभव प्रयास में जुटा है।

पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के झांसी मेडिकल कॉलेज में आग लगने की घटना में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने घायलों के लिए 50,000 रुपये की सहायता राशि की भी घोषणा की। इसके अलावा उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतक नौनिहाल के परिजनों को 5-5 लाख एवं गंभीर घायलों को 50-50 हजार रुपए तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

10 बच्चों की हुई थी मौत

बता दें, झांसी के जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने संवाददाताओं बताया कि अस्पताल की नवजात शिशु देखभाल इकाई (एनआईसीयू) में शुक्रवार रात दस बजकर 45 मिनट पर संभवत: शार्ट सर्किट से आग लग गयी थी। इस घटना में 10 बच्चों की मौत हो गई और 16 गंभीर रूप से झुलस गए। एनआईसीयू में जिस समय आग लगी, उस समय करीब 57 बच्चे भर्ती थे।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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