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दिल्ली-कटरा हाईवे की 28 अगस्त को समीक्षा करेंगे पीएम मोदी, परियोजना में आ रही हैं ये बाधाएं

PM to review Delhi-Katra Highway: दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर हाल में हुई दो घटनाओं के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसकी समीक्षा करेंगे। आने वाली 28 अगस्त को पीएम मोदी इस हाईवे परियोजना की स्थिति का जायजा लेंगे। पंजाब में भूमि का कब्जा अभी भी लंबित है। जानिए पूरा अपडेट।

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28 अगस्त को दिल्ली-कटरा हाईवे की समीक्षा करेंगे।

Delhi-Katra Highway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 28 अगस्त (बुधवार) को दिल्ली-कटरा हाईवे की समीक्षा करेंगे। पीएम मोदी (PM Modi) सड़क एवं परिवहन मंत्रालय से प्रगति के बारे में स्थिति का जायजा लेंगे। 10 अगस्त को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली-करता एक्सप्रेसवे के बारे में पंजाब के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था।

लगातार प्रयास कर रही है पुलिस प्रशासन

पंजाब में करीब 300 किलोमीटर की दूरी तक गुजरने वाले 600 किलोमीटर लंबे दिल्ली-कटरा हाईवे को लेकर बीते दिनों एक नया विवाद हाल ही मे सामने आया था। लुधियाना, गुरदासपुर और जालंधर में भूमि का कब्जा अभी भी लंबित है। 18 किलोमीटर हिस्से का भूमि का कब्जा अभी भी लंबित है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस एनएचएआई के साथ मिलकर दिल्ली-कटरा हाईवे के लिए भूमि का कब्जा लेने के लिए बार-बार प्रयास कर रहे हैं।

ठेकेदारों और इंजीनियरों के साथ हुई मारपीट

गडकरी ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि यदि कानून-व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो एनएचएआई पंजाब में 8 परियोजनाओं को रद्द कर देगा। पंजाब में दिल्ली-कटरा हाईवे परियोजना में बाधाएं आ रही हैं, क्योंकि किसान एनएचएआई को भूमि का कब्जा नहीं दे रहे हैं। परियोजना पर काम कर रहे ठेकेदारों और इंजीनियरों को धमकाया गया और उनके साथ मारपीट की गई।

सीएम भगवंत मान को चिट्ठी लिखकर चेताया

पंजाब में अगर कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो एनएचएआई के पास राज्य की आठ राजमार्ग परियोजनाओं को रद्द या बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को लिखे पत्र में यह चेतावनी दी है। इस परियोजनाओं की कुल लंबाई 293 किलोमीटर है और लागत 14,288 करोड़ रुपये है।

गडकरी ने कहा था कि 'यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो एनएचएआई के पास 14,288 करोड़ रुपये की लागत और 293 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली आठ अन्य गंभीर रूप से प्रभावित परियोजनाओं को रद्द/बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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