Democratic Countries And Parliament: विश्व में 195 देश हैं और इनमें से 193 देश संयुक्त राष्ट्र (UN) के सदस्य हैं जबकि दो देश होली सी और फिलिस्तीन इस संस्था के सदस्य नहीं हैं, इन्हें पर्यवेक्षक देश का दर्जा मिला हुआ है। इन सभी देशों में सरकारें और एक व्यवस्था काम करती हैं। कहीं पर लोकतांत्रिक तो कहीं कम्युनिस्ट सरकारें हैं तो कुछ देशों में तानाशाह सरकार और व्यवस्था चलाते हैं। लोकतांत्रिक देशों की अगर बात करें तो दुनिया में करीब 120 देश ऐसे हैं जहां जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से मतदान के जरिए चुने गए उसके प्रतिनिधि सरकारें चलाते हैं। कुछ देशों में लोकतंत्र बिल्कुल जीवंत रूप में है, जैसे कि भारत, अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस।
अंगोला, बेनिन, इथियोपिया में मिश्रित रूप
दुनिया में कई देश ऐसे भी हैं जहां लोकतंत्र की नींव कमजोर है। लोकतांत्रिक रूप से कमजोर देशों में पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव हैं। कई ऐसे भी देश हैं जहां लोकतंत्र और तानाशाही का मिश्रित रूप है। इस व्यवस्था में अंगोला, बेनिन, इथियोपिया और कुवैत जैसे देशों की गिनती होती है। कम्युनिस्ट देशों में चीन, क्यूबा, लाओस, वियतनाम और नॉर्थ कोरिया शामिल हैं। माली, म्यांमार, चाड, गुएना, बरकिना फासो, नाइजर और गाबोन में तानाशाह अपने फरमानों से सरकार और अपने देश की व्यवस्था चलाते हैं।
संसद में होती है बहस फिर बनता है कानून
कहने का मतलब है कि सरकारें कोई भी हो देश को चलाने के लिए उन्हें काम करना पड़ता है, एक व्यवस्था बनानी पड़ती है। यह व्यवस्था लोकतांत्रिक, कम्युनिस्ट, मिश्रित और तानाशाही कोई भी हो सकती है। यहां हम लोकतांत्रिक देशों की व्यवस्था की बात करेंगे। लोकतांत्रिक देशों में लोकतंत्र की सबसे सर्वोच्च संस्था संसद होती है। इसी संसद में जनता की ओर से चुने गए नुमाइंदे पहुंचते हैं। बहुमत वाला राजनीतिक दल सरकार बनाता है और जिसे बहुमत नहीं मिलता यानी कि विपक्षी राजनीतिक दल विपक्ष में बैठते हैं। संसद लोगों और सरकार की जरूरतों के मुताबिक कानून बनाती है। संसद जनता की आकांक्षाओं एवं सपनों का प्रतिबिंब होती है।
संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष में बनता है गतिरोध
जनता के सपनों और देश के उज्जवल भविष्य के लिए संसद में कामकाज करती है। लोकतांत्रिक संसदीय व्यवस्था में असहमति की बहुत बड़ी भूमिका होती है। मुद्दों, कानून या किसी नई व्यवस्था को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार कई दिनों तक गतिरोध बन जाता है। विपक्ष के हंगामे की वजह से सदन की कार्रवाई बार-बार भंग होती है। इससे सदन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। भारत की अगर बात करें तो यहां संसदीय गतिरोध बहुत लंबे समय तक चलता है। कई बार तो पूरा का पूरा सत्र विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ जाता है। बावजूद इसके संसदीय परंपरा और लोकतंत्र कमजोर नहीं पड़ता। संसद चलाने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष बीच का रास्ता भी निकाल लेते हैं। यहां हम दुनिया के बड़े देशों की संसदों में कितने दिन कामकाज होता है, उस पर एक नजर डालेंगे-
कहां कितने दिन चलती है संसद
| देश | दिन |
| भारत- | 56 |
| अमेरिका - | 164 |
| ब्रिटेन | 152 |
| ब्राजील | 107 |
| जर्मनी | 68 |
| जापान | 50 |
| द. अफ्रीका | 46 |
