जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने अनिश्चितकालीन अनशन स्थल से जबरन हटाए जाने के बाद समर्थकों के नाम अपना पहला संदेश जारी किया है। अस्पताल से भेजे इस संदेश में उन्होंने खुद को भर्ती कराए जाने को अवैध हिरासत करार दिया है। वांगचुक ने समर्थकों से 20 जुलाई को होने वाले 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित संसद मार्च को सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने संगठन के इस मौजूदा अभियान को भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन बताया है।
वांगचुक के अनशन का 21वां दिन
यह संदेश रविवार को सामने आया, जब इसके एक दिन पहले यानी शनिवार (18 जुलाई) को दिल्ली पुलिस ने वांगचुक के अनशन के 21वें दिन उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया था। 59 वर्षीय कार्यकर्ता ने अपनी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो (Gitanjali J Angmo) के माध्यम से यह संदेश बाहर भेजा है। एक मुड़े-तुड़े कागज पर हाथ से लिखा यह नोट वांगचुक के आधिकारिक 'X' (ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट किया गया है, जिसमें उन्होंने एक "भय-मुक्त" और "अन्याय-मुक्त" भारत का आह्वान किया है।
अपने अनशन और CJP के विरोध प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे पेपर लीक का जिक्र करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि आज देश को "अन्याय से आजादी" की जरूरत है। उन्होंने अपनी कथित 'अवैध हिरासत' की तुलना देश में फैले डर के माहौल से की।
संसद मार्च पर संशय बरकरार
एक तरफ जहां वांगचुक ने CJP के सोमवार को होने वाले संसद मार्च के लिए जनसमर्थन मांगा है, वहीं इस रैली के आयोजन पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, संगठन ने शनिवार (18 जुलाई) तक इस रैली के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं मांगी थी। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि संसद के आगामी मानसून सत्र के मद्देनजर, अगर CJP अब आवेदन करती भी है, तो इस मार्च की अनुमति मिलने की संभावना बेहद कम है।
सोनम वांगचुक का हेल्थ अपडेट
रविवार को सफदरजंग अस्पताल ने हेल्थ बुलेटिन जारी कर बताया कि वांगचुक को आवश्यक चिकित्सा उपचार दिया जा रहा है और विशेषज्ञों की एक टीम उनकी स्थिति पर करीब से नजर रख रही है।
अस्पताल का बयान: "वर्तमान में उनके मुख्य शारीरिक मानक (Vital Parameters) स्थिर हैं; हालांकि, खून के कुछ पैरामीटर्स में थोड़ा बदलाव आया है। लंबे समय तक उपवास रखने के कारण शरीर पर पड़ने वाले शारीरिक तनाव और प्रभावों को देखते हुए, उन्हें विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम की देखरेख में निरंतर चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है।"
इलाज से इनकार: इससे पहले शनिवार को अस्पताल ने बताया था कि डॉक्टरों और एम्स (AIIMS) के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ की बार-बार काउंसलिंग के बावजूद वांगचुक ने ड्रिप (IV Fluids), ओआरएस (ORS) और कोई भी दवा लेने से मना कर दिया था। उनके परिवार ने भी तब तक अनुशंसित चिकित्सा उपचार के लिए सहमति नहीं दी थी।
क्यों धरने पर बैठे हैं सोनम वांगचुक?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि डॉक्टरों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए वांगचुक को जरूरी चिकित्सा देखभाल के लिए अस्पताल शिफ्ट किया गया था। शुक्रवार रात को वांगचुक ने कहा था कि हालत बिगड़ने के बावजूद वह अनशन जारी रखने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने दावा किया था कि अनशन के कारण उनका 20% वजन कम हो चुका है।
सोनम वांगचुक ने NEET परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए 28 जून को अपना अनशन शुरू किया था। शनिवार को उनके इस अनशन का 21वां दिन था। यह लंबा अनशन 'कॉकरोच जनता पार्टी' के उस व्यापक आंदोलन का हिस्सा है, जिसके तहत परीक्षा घोटालों की न्यायिक जांच, जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की मांग की जा रही है।
