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All Party Meeting: पहले किया बहिष्कार, फिर सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए विपक्षी नेता; NCPI को न्योते पर मचा विवाद

संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई, लेकिन विपक्ष के कई प्रमुख दलों ने इसका बहिष्कार कर था। हालांकि, सांकेतिक विरोध के बाद विपक्षी नेता बैठक में शामिल हो गए।

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विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया है। ANI

Photo : ANI

All Party Meeting: सरकार ने संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई। हालांकि, पहले को विपक्ष ने सांकेतिक तौर पर सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कियास लेकिन बाद में बैठक में शामिल हो गए। समाजवादी पार्टी नेता, कांग्रेस टीएमसी के नेताओं ने बैठक का बहिष्कार किया था। विपक्षी दलों ने एनसीपीआई को मान्यता देने का विरोध किया था। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा का कहना था कि आखिर बागी सांसदों को मीटिंग में क्यों बुलाया गया।

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, "आज कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दल, शिवसेना और यूबीटी समेत पूरा विपक्ष सर्वदलीय बैठक से विरोध जताते हुए बाहर चला गया। इसका कारण यह है कि तथाकथित एनसीपी, जो एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है, के अनुसार टेबल ऑफिस द्वारा दी गई सूची में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की संख्या 28 दिखाई गई है। इन तथाकथित बागी सांसदों के विलय को स्पीकर ने मंजूरी नहीं दी है।"

उन्होंने आगे कहा कि 20 अयोग्यता याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। 91वें संशोधन के बाद अलग गुट के लिए कोई जगह नहीं है। तो संसदीय कार्य मंत्री ने इन 20 बागी सांसदों को किस आधार पर निमंत्रण दिया और वे इस बैठक में कैसे शामिल हो रहे हैं? हमने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और विरोध के प्रतीक के रूप में बैठक से बाहर चले गए हैं। हम अपने सभी विपक्षी दलों को धन्यवाद देते हैं।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "कांग्रेस ने संविधान की रक्षा के लिए वॉकआउट किया है। अंतिम निर्णय लिए बिना पूर्वानुमान लगाना पूरी तरह से असंवैधानिक है।"

आप, शिवसेना यूबीटी ने भी जताया विरोध

शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत कहते हैं, "इन (बागी सांसदों) को दी गई संबद्धता, कानून की किताबों में यह शब्द कहां है? हमने भी इसका विरोध किया और सदन से वॉकआउट किया।" आम आदमी पार्टी के सांसद एनडी गुप्ता ने कहा, "हमारे मामले में राज्यसभा के 10 सांसदों में से 7 को अगवा कर लिया गया है और इस बात पर फैसला करने के लिए हमारी याचिका लंबित है कि यह वैध है या नहीं। इसके बावजूद, उन्होंने राज्यसभा में स्वतंत्र सीटें आवंटित की हैं। यह लोकतंत्र का सरासर अपहरण और हत्या है।"

सरकार ने एनसीपीआई को बैठक में किया आमंत्रित

बता दें कि केंद्र सरकार ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को सर्वदलीय बैठक के लिए आमंत्रित किया था, जिसमें एनसीपीआई नेता सुदीप बंदोपाध्याय और काकोली घोष भी शामिल होते। इससे पहले लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई का दामन थामने वाले इन 20 सांसदों के NCPI में और शिवसेना (UBT) के 6 सांसदों के शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी थी।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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