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US DOJ vs Adani: 600 पन्नों की दलील और 10 हफ्ते की कानूनी लड़ाई से गौतम अदाणी को मिली राहत

अमेरिका में रिश्वतखोरी और प्रतिभूति धोखाधड़ी मामले में हाल ही में सामने आए अदालती दस्तावेज बताते हैं कि बचाव पक्ष की कानूनी दलीलों ने मामले की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।

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गौतम अदाणी

Photo : PTI

उद्योगपति गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे बहुचर्चित रिश्वतखोरी और प्रतिभूति धोखाधड़ी मामले को खत्म कराने में करीब 10 सप्ताह तक चली एक व्यापक कानूनी रणनीति ने अहम भूमिका निभाई। हाल ही में सार्वजनिक किए गए अदालती दस्तावेजों से पता चलता है कि अदाणी की ओर से बचाव पक्ष के लगभग 600 पृष्ठ के कानूनी तर्क, प्रस्तुतियों और विशेषज्ञ रिपोर्ट की वजह से अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) मामले पर पुनर्विचार करने पर सहमत हुआ।

अदाणी के प्रमुख वकील और सुलिवन एंड क्रॉमवेल एलएलपी के सह-प्रमुख रॉबर्ट जे. गिफ्रा जूनियर ने 14 जुलाई को दाखिल दस्तावेज में बताया कि तीन फरवरी से 17 अप्रैल, 2026 के बीच बचाव पक्ष ने अभियोजन अधिकारियों के समक्ष अपना जवाब और प्रस्तुतियां दाखिल कीं। इसके अलावा मार्च में अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) को 151 पृष्ठ की एक अलग प्रस्तुति दी गई।

20 नवंबर, 2024 को हुई थी शुरुआत

इस मामले की शुरुआत 20 नवंबर, 2024 को हुई थी, जब अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप पत्र सार्वजनिक किया था। इसमें गौतम अदाणी, उनके भतीजे और अदाणी ग्रीन एनर्जी लि. के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी, पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी ( सीईओ) विनीत जैन और अन्य लोगों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने सौर ऊर्जा आपूर्ति अनुबंध हासिल करने के लिए भारत में सरकारी अधिकारियों को 25 करोड़ डॉलर से अधिक की रिश्वत देने की साजिश रची।

अमेरिकी अभियोजकों का आरोप था कि इन अनुबंधों से अगले दो दशक में दो अरब डॉलर से अधिक का शुद्ध लाभ मिलने की संभावना थी। अभियोजन पक्ष ने यह भी दावा किया था कि निवेशकों को कथित योजना के बारे में गलत जानकारी दी गई, जिसके आधार पर समूह ने तीन अरब डॉलर से अधिक की राशि ऋण और बॉन्ड के जरिये जुटाई। अदाणी समूह ने इन आरोपों को लगातार खारिज करते हुए इन्हें निराधार बताया था।

कोर्ट को दिया गया यह तर्क

करीब 600 पृष्ठ की कानूनी दलीलों की रणनीति अदालती दस्तावेजों के अनुसार, अगस्त, 2025 में नियुक्त हुई कानूनी टीम ने कई महीनों तक मामले से जुड़े दस्तावेजों और अभियोजन पक्ष के तर्कों का गहन अध्ययन किया। इसके बाद फरवरी से अप्रैल, 2026 के बीच सरकार को विस्तृत जवाब सौंपे गए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि अमेरिकी प्रतिभूति कानूनों का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जा रहा है, जिनका अधिकांश हिस्सा अमेरिका के बाहर हुआ।

अदालती दस्तावेजों में यह भी सामने आया कि बचाव पक्ष ने दो बार गौतम अदाणी के नवंबर, 2024 के उस सोशल मीडिया संदेश का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने अमेरिका में ऊर्जा सुरक्षा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 10 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी। कंपनी का कहना था कि इससे 15,000 तक रोजगार को समर्थन मिलेगा। हालांकि, अमेरिकी अभियोजकों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला ने 11 मई के ईमेल में स्पष्ट किया कि आपराधिक आरोपों के समाधान के बदले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश की पेशकश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

1.2 करोड़ डॉलर का जुर्माना भरने पर दी सहमति

आपराधिक मामले के समानांतर एसईसी की सिविल कार्रवाई भी आगे बढ़ी। एसईसी के प्रस्तावित समझौते के तहत गौतम अदाणी ने 60 लाख डॉलर और सागर अडानी ने 1.2 करोड़ डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमति जताई।बाद में एसईसी के नियमों में बदलाव के बाद समझौते से जुड़े कुछ प्रावधानों में संशोधन किया गया। अमेरिकी न्याय विभाग ने मामले को वापस लेने के पीछे भारत में कथित घटनाओं का केंद्रित होना, अधिकार क्षेत्र से जुड़ी कठिनाइयां, पर्याप्त सबूतों की चुनौती और बदली हुई प्रवर्तन प्राथमिकताओं को कारण बताया।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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