Parliament Budget Session: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा, सदन से किया वॉकआउट
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 3, 2026, 06:28 PM IST
उच्च सदन में शून्यकाल समाप्त होते ही जैसे ही सभापति सी पी राधाकृष्णन ने प्रश्नकाल शुरू करने को कहा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते से जुड़ी अहम जानकारियां सरकार के बजाय वाशिंगटन से सामने आ रही हैं। रमेश ने सरकार से संसद को विश्वास में लेने, पूरे मसौदे सदन में रखने और इस पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।
राज्यसभा। Credits: Rajya Sabha TV
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर संसद को विश्वास में लेने और इसके मसौदे सदन के पटल पर रखकर व्यापक चर्चा कराने की मांग को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने मंगलवार को राज्यसभा से वॉकआउट किया। सत्ता पक्ष ने इसे विपक्ष की हताशा करार देते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे पर वक्तव्य देने और चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है।
उच्च सदन में शून्यकाल समाप्त होते ही जैसे ही सभापति सी पी राधाकृष्णन ने प्रश्नकाल शुरू करने को कहा, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते से जुड़ी अहम जानकारियां सरकार के बजाय वाशिंगटन से सामने आ रही हैं। रमेश ने सरकार से संसद को विश्वास में लेने, पूरे मसौदे सदन में रखने और इस पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने उनका समर्थन किया।
नड्डा ने कही ये बात
विपक्ष के हंगामे के बीच सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बीती रात सोशल मीडिया पर भारतीय वस्तुओं पर शुल्क में कटौती की जानकारी साझा की और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘सच्चा दोस्त’ बताया। नड्डा ने आरोप लगाया कि विपक्ष अच्छी बातों में भी बुराई खोज रहा है और उसकी हताशा सामने आ रही है।
नड्डा ने सदन को आश्वस्त किया कि सरकार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चर्चा के लिए तैयार है और समझौते से जुड़ा हर छोटा-बड़ा विवरण देने को भी तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वतः संज्ञान लेते हुए आज ही इस विषय पर वक्तव्य देगी। हालांकि, उन्होंने विपक्ष के हंगामे को लोकतंत्र के लिए घातक बताते हुए कांग्रेस और ‘इंडी’ गठबंधन के रवैये की आलोचना की।
इस दौरान विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी जारी रही और उन्होंने सरकार पर देशहितों से समझौता करने के आरोप लगाए। सभापति राधाकृष्णन ने सदस्यों से अपील की कि जब सरकार वक्तव्य दे रही है तो उसे सुना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष हंगामे का रास्ता अपना रहा है।
नारेबाजी करते हुए सदन के वेल की ओर बढ़े विपक्षी सांसद
हंगामा थमने के बजाय बढ़ता देख विपक्षी सदस्य नारे लगाते हुए अपनी सीटों से उठे और सदन के वेल की ओर बढ़ गए। नड्डा ने दोहराया कि सरकार आज ही वक्तव्य देगी और चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष पर हर मुद्दे पर राजनीति करने और सदन में यह दिखाने का आरोप लगाया कि मानो सरकार चर्चा से बच रही हो।
टीएमसी को छोड़ सभी दलों के सांसदों ने किया वॉकआउट
इसके बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को छोड़कर लगभग सभी विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया। टीएमसी सांसद साकेत गोखले कुछ देर तक सदन में बैठे रहे और बाद में बाहर चले गए। बाद में टीएमसी सदस्यों ने स्पष्ट किया कि उनका बहिर्गमन दिल्ली पुलिस द्वारा एसआईआर-प्रभावित परिवारों के साथ कथित व्यवहार के विरोध में था। टीएमसी ने यह भी बताया कि एक दिन पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित ‘बंग भवन’ के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों से बहस हुई थी। ममता बनर्जी ने अपने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित परिवारों के उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
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