राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने इस साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मामले में सोमवार को सात आरोपियों के खिलाफ 1597 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई है। इनमें पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटीटी) और उसके मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) के गुर्गे और पड़ोसी देश में मौजूद उनका आका भी शामिल हैं।
लश्कर-ए-तैयबा/टीआरएफ ने रची थी हमले की साजिश
आरोपपत्र में पाकिस्तान की साजिश, आरोपियों की भूमिका और मामले को साबित करने में सहायक सबूतों का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें बताया गया है कि प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा/टीआरएफ ने पहलगाम हमले की साजिश रची, आतंकियों को साजो-सामान मुहैया कराया। इतना ही नहीं हमले को अंजाम देने में उसकी भूमिका के लिए एक कानूनी इकाई के तौर पर आरोपित किया गया है।
भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धारा भी लगाई
एनआईए ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे आका साजिद जट्ट को भी जम्मू स्थित विशेष एनआईए न्यायालय में दाखिल आरोपपत्र में बतौर आरोपी नामजद किया गया है। इसके अलावा, उन तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों के नाम भी शामिल हैं, जिन्हें आतंकी हमले के 99 दिन बाद 29 जुलाई को श्रीनगर के दाचीगाम में ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान सेना ने मार गिराया था। तीनों की पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। एनआईए ने अपने आरोपपत्र में आरोपियों के खिलाफ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धारा भी लगाई है।
पाकिस्तान से जुड़े पूरी साजिश के तार
एनआईए के मुताबिक, उसने लगभग आठ महीने तक चली विस्तृत वैज्ञानिक जांच में पता लगाया कि इस पूरी साजिश के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं, जो भारत के खिलाफ आतंकवाद को लगातार प्रायोजित कर रहा है। आतंकवादियों को पनाह देने के आरोप में एनआईए द्वारा 22 जून को गिरफ्तार परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथर के खिलाफ भी आरोपपत्र दायर किया है। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने हमले में संलिप्त तीन सशस्त्र आतंकवादियों की पहचान उजागर की। साथ ही यह भी बताया की कि वे प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन से जुड़े पाकिस्तानी नागरिक थे।
