देश में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षाबलों और सरकार की पुनर्वास योजनाओं का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक दशक में 10,000 से अधिक माओवादियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में वापसी की है, जबकि नक्सली संगठन का शीर्ष नेतृत्व भी काफी हद तक खत्म कर दिया गया है।
नक्सलवाद खत्म करने की सीमा 31 मार्च
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने के लिए 31 मार्च तक की समयसीमा तय कर रखी है। इसी दिशा में लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2025 में करीब 2,300 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 2026 के पहले तीन महीनों में ही 630 से अधिक नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का निर्णय लिया। ये आंकड़े वर्ष 2014 से 2026 की शुरुआत तक के आत्मसमर्पण के रुझान को दर्शाते हैं।
सरकार ने उठाए हैं कई अहम कदम
अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ एकीकृत और बहुआयामी रणनीति अपनाई है, जिसने पहले के बिखरे हुए प्रयासों की जगह ली है। इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण तथाकथित ‘रेड कॉरिडोर’ में तेजी से किया गया बुनियादी ढांचा विकास है। यह क्षेत्र कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के हिस्सों से होते हुए ‘पशुपति से तिरुपति’ तक फैला हुआ था, जहां पहले ठेकेदार काम करने से भी डरते थे।
- सरकार ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़कों और पुलों का निर्माण सौंपा। इसके तहत नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में पांच प्रमुख सड़कों और छह महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, भाकपा (माओवादी) के प्रभाव वाले इलाकों में 15,000 किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण हुआ है, जिनमें से 12,250 किलोमीटर सड़कें पिछले 10 वर्षों में ही तैयार की गईं।
- सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत किया गया है। वर्ष 2014 में जहां इन क्षेत्रों में केवल 66 पुलिस थाने थे, वहीं पिछले दशक में 586 नए थाने बनाए गए। इसके अलावा, पिछले एक साल में 361 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए और अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 68 ऐसे हेलीपैड तैयार किए गए हैं, जहां रात में भी हेलीकॉप्टर उतर सकते हैं।
- इन प्रयासों का असर नक्सली घटनाओं में आई कमी से भी दिखता है। वर्ष 2013 में जहां 76 जिलों के 330 थानों में नक्सली घटनाएं दर्ज होती थीं, वे घटकर जून 2025 तक सिर्फ 22 जिलों के 52 थानों तक सीमित रह गईं।
- सरकार का दावा है कि जिन इलाकों में पहले शासन व्यवस्था कमजोर थी, वहां अब विकास योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत घरों की संख्या मार्च 2024 में 92,847 से बढ़कर अक्टूबर 2025 में 2,54,045 हो गई। इसी अवधि में आधार पंजीकरण और आयुष्मान कार्ड की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
शिक्षा पर जोर
नक्सलवाद के सामाजिक और आर्थिक कारणों को खत्म करने के लिए शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले 10 वर्षों में 250 से अधिक एकलव्य मॉडल स्कूलों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 179 स्कूल पहले ही शुरू हो चुके हैं। इसके साथ ही 11 केंद्रीय विद्यालय और छह नवोदय विद्यालय भी इन क्षेत्रों में खोले गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ विकास और पुनर्वास की संयुक्त रणनीति ने नक्सलवाद के प्रभाव को कमजोर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आने वाले समय में इसके और बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
