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Odisha Train Accident: जिस हादसे में मारे गए 288 लोग, उन ट्रेनों के लोको पायलट और गार्ड का क्या हुआ? सामने आई अहम जानकारी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 4, 2023, 08:18 AM IST

Coromandel Express Derailed: रेलवे अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में शामिल मालगाड़ी के इंजन चालक और गार्ड इस भीषण रेल हादसे में बाल-बाल बच गए। उन्होंने बताया कि हादसे का शिकार हुई कोरोमंडल एक्सप्रेस के लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड घायल हो गए।

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Coromandel Express accident

Photo : IANS

Coromandel Express Derailed: ओडिशा के बालासोर (Balasore Train Accident) में हुआ रेल हादसा (Train Derailed) इस सदी के सबसे बड़े रेल हादसों में से एक है। इस भीषण दुर्घटना में 288 लोगों की मौत हो गई औरऔर 747 घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है। रेल हादसे की तस्वीरें काफी दर्दनाक हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने शनिवार को खुद दुर्घटना वाली जगह का दौरा किया और मृतकों के परिजनों के लिए अनुग्रह राशि का ऐलान किया। उन्होंने कहा है कि हादसे के दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और जो भी दोषी होगा, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।

अब इस हादसे को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि जो ट्रेनें आपस में टकराई थीं, उसके लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड गंभीर रूप से घायल हैं, और उनका इलाज चल रहा है।

बाल-बाल बच गए मालगाड़ी के गार्ड और चालक

रेलवे अधिकारियों ने बताया है कि हादसे में शामिल मालगाड़ी के इंजन चालक और गार्ड इस भीषण रेल हादसे में बाल-बाल बच गए। उन्होंने बताया कि हादसे का शिकार हुई कोरोमंडल एक्सप्रेस के लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और गार्ड घायल हो गए। वहीं दूसरे ट्रेन बेंगलुरू- हावड़ा एक्सप्रेस का गार्ड भी घायलों में शामिल है। सभी का इलाज कराया जा रहा है।

तीन ट्रेनों की हुई थी टक्कर

बता दें, ओडिश के बालासोर में शाम लगभग सात बजे यह रेल हादसा हुआ था। हादसे वाले दिन कोरोमंडल एक्सप्रेस एक मालगाड़ी से टकरा गई, जिससे उसके 17 डिब्बे पटरी से उतर गए। कुछ डिब्बे दूसरी लाइन पर गिर गए, जिससे दूसरी तरफ से आ रही बेंगलुरू- हावड़ा एक्सप्रेस उससे टकरा गई और उसके भी कुछ डिब्बे पटरी से उतर गए। यह रेल हादसा इतना भीषण था कि करीब 90 ट्रेनें प्रभावित हुईं। कुछ ट्रेनों को रद्द किया गया तो कई का रूट डायवर्ट करना पड़ा।

ट्रैक बहाली का काम जारी

रेल हादसे के बाद शनिवार को रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरा कर लिया गया था। रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय प्रशासन के आलवा एनडीआरएफ और सेना की भी मदद ली गई थी। रेल मंत्रालय के मुताबिक, ट्रैक बहाली के काम में 1000 से ज्यादा कर्मचारियों को लगाया गया है। इसके अलावा 7 से अधिक पोकलेन मशीन, 2 एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन, 3 से 4 रेलवे एंड रोड क्रेनों को तैनात किया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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