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हीटवेव पर NHRC सख्त: 21 राज्यों और दिल्ली को एडवांस एक्शन लेने के निर्देश, क्या-क्या कहा?

NHRC On Heatwave: आयोग ने अपने निर्देश में कहा है कि हीटवेव की बढ़ती आवृत्ति, अवधि और तीव्रता का असर सबसे ज्यादा गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों पर पड़ता है।

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हीटवेव पर एनएचआरसी सख्त

Photo : PTI

NHRC Strict On Heatwave: देश में बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 21 राज्यों और दिल्ली को अग्रिम कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने राज्यों से कहा है कि वे संवेदनशील और कमजोर आबादी की सुरक्षा के लिए तत्काल राहत उपाय लागू करें। बता दें कि उत्तर भारत में लगातार तापमान बढ़ रहा है। अप्रैल में ही मई और जून जैसी गर्मी का अहसास होने लगा है।

किन राज्यों को जारी हुआ निर्देश?

आयोग ने जिन राज्यों को निर्देश भेजे हैं, उनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को भी इस दायरे में रखा गया है।

कमजोर तबकों पर सबसे ज्यादा खतरा

आयोग ने अपने निर्देश में कहा है कि हीटवेव की बढ़ती आवृत्ति, अवधि और तीव्रता का असर सबसे ज्यादा गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों पर पड़ता है।

विशेष रूप से दिहाड़ी मजदूर, खुले में काम करने वाले श्रमिक, बुजुर्ग, बच्चे, नवजात और बेघर लोग ज्यादा जोखिम में हैं, क्योंकि इनके पास पर्याप्त आश्रय और संसाधनों की कमी होती है।

स्वास्थ्य और आजीविका पर असर

मानवाधिकार आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि अत्यधिक गर्मी न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि इससे लोगों की आजीविका भी प्रभावित होती है।

हीटवेव के कारण आग लगने की घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे जान-माल दोनों को नुकसान हो सकता है।

आयोग ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच देश में 3,712 लोगों की मौत गर्मी या लू लगने से हुई है। यह आंकड़ा हीटवेव के गंभीर खतरे को दर्शाता है।

आयोग ने सभी राज्यों और दिल्ली के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर कहा-

  • राहत उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करें
  • पहले से तय SOPs का पालन करें
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करें
  • जिला स्तर से समेकित एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार करें
  • समन्वित और समावेशी रणनीति पर आयोग का जोर

तात्कालिक कदम पर्याप्त नहीं

मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया कि हीटवेव से निपटने के लिए सिर्फ तात्कालिक कदम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समन्वित और समावेशी रणनीति की जरूरत है।

राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि राहत उपाय जमीनी स्तर तक पहुंचें और किसी भी वर्ग की अनदेखी न हो।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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