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फिर सुर्खियों में आए स्वामी रामभद्राचार्य, 'मिनी पाकिस्तान' के बाद किया 'बाबर' का जिक्र

स्वामी रामभद्राचार्य के पुराने बयान पर विवाद के बीच उनका एक और नया बयान सामने आ गया है स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा है कि “यहाँ हर एक व्यक्ति को रघुवर का होके रहना है, बाबर का नहीं”। ये बात उन्होंने अपने पुराने बयान पर हो रहे विवाद पर कही है।

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बीते दिनों पश्चिमी यूपी को बोला था 'मिनी पाकिस्तान' (फाइल फोटो | ANI)

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Rambhadracharya Controversy: अपने हालिया विवादित बयान के बाद स्वामी रामभद्राचार्य एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 12 सितंबर 2025 को मेरठ में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को 'मिनी पाकिस्तान' बताया था, जिस पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। अब इस विवाद के बीच उनका एक और नया बयान आया है। स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा है कि “यहां हर एक व्यक्ति को रघुवर का होके रहना है, बाबर का नहीं।”

मेरठ की राम कथा में दिया बयान

बीते दिनों श्रीराम कथा के मंच से स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा, “आज हिंदू धर्म संकट में है, उसे न्याय नहीं मिल रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसा लगता है जैसे यह मिनी पाकिस्तान बन गया हो।” उन्होंने आगे जोड़ा कि अब समय आ गया है कि प्रत्येक हिंदू परिवार अपने घर में धर्मशिक्षा शुरू करे और सनातन संस्कृति के मूल्यों को बच्चों तक पहुंचाए।

“मुखर होना पड़ेगा, चुप रहने का समय नहीं”

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा, “हमें मुखर होना पड़ेगा, अब चुप रहने का समय नहीं है। हम किसी से द्वेष नहीं रखते, लेकिन यदि कोई छेड़ता है, तो उसे छोड़ा भी नहीं जाएगा।” इसके बाद रविवार को उन्होंने अपने बयान को और आगे बढ़ाते हुए कहा कि “हर एक व्यक्ति को रघुवर का होके रहना है, बाबर का नहीं।”

विपक्षी दलों की कड़ी प्रतिक्रिया

स्वामी रामभद्राचार्य के बयानों पर समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “क्या सभी मुसलमान आतंकवादी हैं? ऐसे बयान समाज में नफरत फैलाने वाले और अपमानजनक हैं।” विपक्षी दलों का कहना है कि धार्मिक मंच से दिए जा रहे इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को तोड़ने का काम कर सकते हैं।

विवाद के बावजूद कायम हैं स्वामी रामभद्राचार्य

बढ़ते विरोध के बावजूद स्वामी रामभद्राचार्य अपने बयान से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि हिंदू समाज को एकजुट होकर अपनी संस्कृति और परंपरा की रक्षा करनी होगी।

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