नई दिल्ली: भारतीय सेना की वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) लगातार आधुनिक हो रही है। बदलते वैश्विक परिदृश्य और हाल के युद्धों से मिले अनुभवों के आधार पर, भारतीय सेना अब अत्याधुनिक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
ड्रोन हमलों का बढ़ता खतरा
हाल के वर्षों में सऊदी अरामको (2019), ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की ड्रोन हत्या (2020), जम्मू एयरबेस हमला (2021), और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे उदाहरणों ने दिखाया कि ड्रोन युद्ध की रणनीति को पूरी तरह से बदल सकते हैं। इन घटनाओं ने भारतीय सेना को भी सतर्क कर दिया है और अब सेना वायु रक्षा प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने में जुटी है।
आधुनिक तकनीक का समावेश
भारतीय सेना अब वायु रक्षा प्रणाली को कई स्तरों पर मजबूत कर रही है:
1. नए रडार सिस्टम: ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों को पकड़ने के लिए अत्याधुनिक लो-लेवल लाइट वेट रडार (LLLR) स्थापित किए जा रहे हैं।
2. स्मार्ट गन सिस्टम: एल-70 और ZU-23mm गनों को स्मार्ट गोला-बारूद से लैस किया जा रहा है, जिससे वे ड्रोन को अधिक प्रभावी तरीके से नष्ट कर सकें।
3. मिसाइल सिस्टम: छोटी और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें (QRSAM और MRSAM) सेना की ताकत बढ़ाएंगी।
4. ड्रोन किल सिस्टम: सेना ऐसी तकनीक पर काम कर रही है जिससे ड्रोन को ड्रोन या रॉकेट से नष्ट किया जा सके।
AI और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
भारतीय सेना अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके अपने वायु रक्षा तंत्र को अधिक सशक्त बना रही है। AI आधारित नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली 'आकाशतीर' को विकसित किया जा रहा है, जिससे सेना की प्रतिक्रिया समय में सुधार होगा। इसके साथ ही, 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत स्वदेशी हथियार और रक्षा उपकरणों के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स के साथ सेना का सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
भविष्य के लिए भारतीय सेना की रणनीति
भारतीय सेना अपने सैनिकों को आधुनिक हथियारों और तकनीकों के अनुकूल बनाने के लिए नए प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर ध्यान दे रही है। नई तकनीकों में ऑटोलोडर और वीडियो इंटरफेस जैसी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं, जिससे सैनिकों का प्रशिक्षण अधिक प्रभावी होगा।
बदलते युद्धक्षेत्र को देखते हुए भारतीय सेना की वायु रक्षा प्रणाली लगातार उन्नत हो रही है। सेना और रक्षा उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाकर, नई तकनीकों को अपनाकर, और स्वदेशी हथियारों को प्राथमिकता देकर भारत आने वाले वर्षों में एक मजबूत वायु रक्षा तंत्र स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
