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भाई-भतीजावाद और खुदगर्जी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अभिशाप हैं, SC ने दिखाया आईना

एक मामले की सुनवाई करते हुए SC की पीठ ने कहा कि भाई-भतीजावाद और स्वार्थपरता लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रतिकूल हैं, विशेषकर तब जब यह ऐसे समाज के भीतर हो, जिसमें सरकारी सेवा के सदस्य शामिल हों और जो अपने सदस्यों को पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया के माध्यम से आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराता हो।

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भाई-भतीजावाद पर SC की अहम टिप्पणी

Photo : ANI

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने भाई-भतीजावाद और खुदगर्जी को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अभिशाप बताते हुए हरियाणा सरकार की एक आवासीय समिति द्वारा शासी निकाय के एक सदस्य और उनके अधीनस्थ को किये गये दो फ्लैटों का आवंटन रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें आवंटन प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया गया था।

जानिए क्या था मामला?

इसमें कहा गया कि शासी निकाय के एक सदस्य और उसके अधीनस्थ को किए गए आवंटन मनमाने, पक्षपातपूर्ण थे और आवासीय समिति के खुद के पात्रता मानदंडों का उल्लंघन करते हैं। पीठ ने कहा, भाई-भतीजावाद और स्वार्थपरता लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रतिकूल हैं, विशेषकर तब जब यह ऐसे समाज के भीतर हो, जिसमें सरकारी सेवा के सदस्य शामिल हों और जो अपने सदस्यों को पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया के माध्यम से आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराता हो।

अदालत हुडा, शहरी संपदा और नगर एवं ग्रामीण योजना कर्मचारी कल्याण संगठन (एचईडब्ल्यूओ) के सदस्य दिनेश कुमार की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उच्च श्रेणी के दो सुपर डीलक्स फ्लैट के आवंटन को चुनौती दी गई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता ने विज्ञापन के तहत आवेदन किया था और वह सभी मानदंडों पर पात्र था, उसने प्रतिनियुक्ति अवधि और मूल वेतन दोनों आवश्यकताओं को पूरा किया था।

पीठ ने कहा, उस शासी निकाय के सदस्य को कोई तरजीही आवंटन नहीं दिया जा सकता था, जो हुडा की सेवा में छह महीने की प्रतिनियुक्ति अवधि को भी पूरा नहीं कर रहा था। हमें तीसरे प्रतिवादी को किए गए आवंटन को बरकरार रखने का कोई कारण नहीं नजर आता। यह आवंटन स्पष्ट रूप से पक्षपात और स्वार्थ का खुला प्रदर्शन है।

शक्तियों और अधिकार के घोर दुरुपयोग को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द कर दिया और हुडा पर एक लाख रुपये का जुर्माना, तीसरे प्रतिवादी (बी.बी. गुप्ता) पर 50,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना और चौथे प्रतिवादी (पूरन चंद) पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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