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वांगचुक की बिगड़ती सेहत, राहुल की दूरी और मोदी सरकार की बेरुखी; कैसा चल रहा है जंतर-मंतर पर आंदोलन, क्या फंस गई 'कॉकरोच' पार्टी?

Cockroach Janta Party Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन का तीसरा हफ्ता। अराजनीतिक 'कॉकरोच जनता पार्टी' के आंदोलन के बीच राहुल गांधी की अनुपस्थिति और मोदी सरकार की बेरुखी पर बड़ा पॉलिटिकल एक्सप्लेनर।

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वांगचुक की बिगड़ती सेहत, राहुल की दूरी और मोदी सरकार की बेरुखी; कैसा चल रहा है जंतर-मंतर पर आंदोलन, क्या फंस गई 'कॉकरोच' पार्टी?

Sonam Wangchuk Hunger Strike 2026: लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा (6th Schedule) दिलाने और देश में पेपर लीक (NEET/CBSE) के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन अब एक बेहद जटिल मोड़ पर पहुंच गया है। मशहूर पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) के आमरण अनशन का तीसरा हफ्ता (17वां दिन) चल रहा है। उनका वजन 8 किलोग्राम तक गिर चुका है और डॉक्टरों के मुताबिक उनके शरीर का 'मसल मास' तेजी से कम हो रहा है।

लेकिन इस मानवीय संकट के बीच, यह आंदोलन देश की दो बड़ी राजनीतिक ताकतों-एक तरफ नरेंद्र मोदी सरकार की 'उदासीनता' और दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की 'दूरी' के बीच पिसता नजर आ रहा है। आइए आसान भाषा में डिकोड करते हैं इस 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के अराजनीतिक आंदोलन और इसके पीछे की इनसाइड पॉलिटिकल स्टोरी को।

क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी' और यह आंदोलन क्यों अलग?

इस आंदोलन का नेतृत्व अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) कर रहे हैं, जो पहले आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े रहे हैं। उन्होंने इस साल की शुरुआत में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक तल्ख टिप्पणी से प्रेरित होकर व्यंग्यात्मक रूप से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का गठन किया था।

युवाओं और Gen-Z का आंदोलन

CJP का मुख्य फोकस देश के उन युवाओं को जोड़ना है जो पारंपरिक राजनीति और राजनीतिक दलों के 'लेबल' से कतराते हैं। आंदोलन की शुरुआत में दिपके ने साफ कहा था कि वे देश के किसी भी मौजूदा राजनीतिक दल को इस मंच पर नहीं आने देंगे, क्योंकि आज देश में युवाओं और लद्दाख की जो हालत है, उसके लिए कहीं न कहीं सभी पार्टियां जिम्मेदार हैं।

हालांकि, अब आंदोलन के लंबा खिंचने और वांगचुक की सेहत बिगड़ने के बाद CJP ने अपना रुख थोड़ा नरम किया है। अब उन्होंने सभी दलों को आमंत्रित किया है, लेकिन एक सख्त शर्त के साथ, 'पार्टी का झंडा घर छोड़कर आएं, हाथ में सिर्फ तिरंगा होना चाहिए।'

मोदी सरकार का रुख

17 दिन बीत जाने के बाद भी केंद्र सरकार या बीजेपी के किसी प्रतिनिधिमंडल ने सोनम वांगचुक से मुलाकात या बातचीत करने की कोशिश नहीं की है। सरकार ने इस आंदोलन को कड़ा और आक्रामक तरीके से हैंडल करने की रणनीति अपनाई है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आंदोलनकारियों के लिए सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए इन्हें आतंकवादियों की बी-टीम तक कह दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इसे 'देश को बांटने की कोशिश करने वाली वायरस और कॉकरोच जैसी पार्टियां' करार दिया है।

वहीं, जब अभिजीत दिपके ने वांगचुक से अनशन तोड़ने की भीख मांगी, तो वांगचुक का जवाब था, 'मुझसे अनशन तोड़ने को मत कहो। सरकार से पूछो कि वह संवाद करने से भी क्यों कतरा रही है?'

क्यों सरकार जल्द करेगी सोनम वांगचुक से बात?

क्यों सरकार जल्द करेगी सोनम वांगचुक से बात?

गायब राहुल गांधी, जंतर-मंतर क्यों नहीं गए?

एक तरफ जहां कांग्रेस और पूरी विपक्षी ताकतें संसद में पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेर रही हैं, वहीं राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर चल रहे इस सबसे बड़े छात्र आंदोलन से दूरी बना रखी है। राहुल गांधी ने सीबीएसई (CBSE) घोटाले से प्रभावित कुछ छात्रों से अपने घर पर मुलाकात तो की, लेकिन वे जंतर-मंतर पर CJP के मंच पर नहीं पहुंचे। वर्तमान में वे एक लंबी विदेश यात्रा पर हैं, जिसके कारण कांग्रेस के कई प्रस्तावित छात्र प्रदर्शन (जैसे प्रयागराज, पटना, दिल्ली) टाल दिए गए हैं।

कांग्रेस ने 17 जून को अपना खुद का कैंपेन 'छात्रों की गूंज' लॉन्च किया है। यानी कांग्रेस वांगचुक या CJP के बैनर के नीचे जाने के बजाय अपने बैनर तले क्रेडिट लेना चाहती है। राहुल गांधी की इस अनुपस्थिति पर बीजेपी ने तंज कसते हुए कहा कि जब वायनाड (उनका पुराना गढ़) बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है और देश में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं, तब नेता प्रतिपक्ष देश से बाहर हैं।

2011 का 'अन्ना आंदोलन' बनाम 2026 का 'कॉकरोच आंदोलन'

इस आंदोलन की तुलना 12-15 साल पहले हुए अन्ना हजारे के 'जन लोकपाल आंदोलन' से की जा रही है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा और खुद अभिजीत दिपके ने इस अंतर को रेखांकित किया है।

बदला हुआ दौर:

2011 में जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) सरकार थी, तब अन्ना हजारे के अनशन को सरकार की तरफ से सम्मान मिला था, मंत्रियों के दल बातचीत के लिए जाते थे (भले ही उस आंदोलन ने बाद में कांग्रेस की सरकार गिरा दी)। लेकिन आंदोलनकारियों का आरोप है कि 2026 की वर्तमान सरकार के लिए 'मानवीय जीवन की कीमत वैसी नहीं रह गई है' और इसे एक 'ईगो की लड़ाई' बना दिया गया है।

हालांकि, खुद सोनम वांगचुक अपने आपको 'आधुनिक गांधी' या 'अन्ना का उत्तराधिकारी' कहलाने से बचते हैं। उनका कहना है कि वह केवल लद्दाख और देश के छात्रों के प्रति एक आम नागरिक की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

आगे क्या होगा? विपक्ष का 'आउटसाइड सपोर्ट' और संसद मार्च

भले ही राहुल गांधी सीधे इस मंच पर न आए हों, लेकिन इंडिया (INDIA) गठबंधन के कई बड़े नेता जैसे महुआ मोइत्रा (TMC), उद्धव ठाकरे (Shiv Sena UBT), आतिशी (AAP), और वामपंथी नेता (Brinda Karat, Annie Raja) इस आंदोलन को अपना समर्थन दे चुके हैं। अरविंद केजरीवाल ने भी फोन कर वांगचुक की सेहत का हाल जाना है।

20 जुलाई को संसद मार्च: CJP ने संसद के आगामी मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च करने का ऐलान किया है।

संसद में गूंजेगा मुद्दा: शिवसेना (UBT) ने कहा है कि वे महाराष्ट्र में इसके समर्थन में समानांतर प्रदर्शन करेंगे और संसद के पटल पर इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएंगे।

कुल मिलाकर देखा जाए तो सोनम वांगचुक का यह अराजनीतिक मंच अब देश की सत्ता और विपक्ष की नूराकुश्ती के बीच एक बड़ा लिटमस टेस्ट बन गया है। यदि सरकार संवाद नहीं करती और विपक्ष केवल अपनी अलग रैलियां करता रहता है, तो यह देश के युवाओं में पारंपरिक राजनीति के प्रति अविश्वास को और ज्यादा बढ़ा देगा।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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