US Citizen Arrested Nepal Border: भारत-नेपाल सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) और उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बेहद संवेदनशील और संदिग्ध मामले में एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के सोनौली (Sonauli) बॉर्डर के पास से दबोचे गए इस विदेशी नागरिक के पास से चीनी पासपोर्ट, नेपाली करेंसी, कई धार्मिक किताबें और एक अत्याधुनिक एआई (AI) संचालित ट्रांसलेशन डिवाइस बरामद हुई है। इतने संवेदनशील दस्तावेज और संदिग्ध सामान मिलने के बाद भारत की तमाम केंद्रीय खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां हाई-अलर्ट पर हैं और आरोपी से लगातार कड़ी पूछताछ कर रही हैं।
कौन है गिरफ्तार विदेशी नागरिक?
गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान जॉर्डन ब्राउन (Jordan Brown) के रूप में हुई है, जो अमेरिका के कैलिफोर्निया का रहने वाला है।
कैसे हुआ गिरफ्तार: जॉर्डन ब्राउन बिना किसी वैध भारतीय वीजा या वैध यात्रा दस्तावेजों के अवैध रूप से भारत से नेपाल में घुसने की कोशिश कर रहा था, तभी सीमा पर मुस्तैद एसएसबी (SSB) के जवानों ने उसे धर दबोचा।
सोनौली थाने में केस दर्ज: अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने और बिना दस्तावेजों के सीमा पार करने के आरोप में विदेशी नागरिक के खिलाफ सोनौली पुलिस स्टेशन में इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्ट की धारा 21 और 23 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
तलाशी में मिला चीनी पासपोर्ट और एआई (AI) डिवाइस
अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) सिद्धार्थ ने बताया कि आरोपी के पास से बरामद सामानों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। पुलिस को उसके पास से जो चीजें मिली हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी नागरिक के पास चीनी पासपोर्ट का मिलना सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है। एजेंसियां जांच कर रही हैं कि यह पासपोर्ट असली है या फर्जी, और जॉर्डन के पास यह कहां से आया। उसके पास से एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अनुवाद उपकरण मिला है, जिसका इस्तेमाल संभवतः स्थानीय भाषाओं को समझने और बातचीत को डिकोड करने के लिए किया जा रहा था। इसके अलावा उसके पास से एक मोबाइल फोन, नेपाली मुद्रा, एक पर्सनल डायरी, हाथ की घड़ी और कुछ धार्मिक पुस्तकें बरामद की गई हैं।
थाईलैंड, श्रीलंका से गोवा... जानिए आरोपी का 'ट्रैवल रूट'
पूछताछ के दौरान जॉर्डन ब्राउन ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने अपना जो ट्रैवल रूट बताया है, वह बेहद पेचीदा और संदेहास्पद है। जॉर्डन के मुताबिक, वह सबसे पहले टूरिस्ट वीजा पर थाईलैंड गया था, जहां कथित तौर पर उसका मूल अमेरिकी पासपोर्ट खो गया। पासपोर्ट खोने के बाद उसने कानूनी रास्ते के बजाय समुद्री मार्ग चुना। वह थाईलैंड से समुद्री रास्ते के जरिए श्रीलंका पहुंचा और फिर वहीं से नवंबर 2025 में समुद्री रास्ते से ही भारत में अवैध रूप से दाखिल हो गया। आरोपी का दावा है कि नवंबर 2025 से वह भारत के गोवा राज्य में छिपकर रह रहा था और अब वह नेपाल भागने की फिराक में था। सुरक्षा एजेंसियां उसके इस बयान का इमिग्रेशन और ट्रैवल रिकॉर्ड्स से मिलान कर रही हैं।
खुफिया एजेंसियां अलर्ट
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग केंद्रीय एजेंसियां स्वतंत्र रूप से उसके दावों, उसकी असली पहचान, पिछले दौरों और भारत में प्रवेश करने के असली मकसद की जांच कर रही हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक की शुरुआती जांच में उसके किसी संदिग्ध आतंकवादी या देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है।
यह गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कुछ ही दिन पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पांच यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों को आतंकी व सैन्य ट्रेनिंग देने के आरोप में गिरफ्तार किया था। एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या जॉर्डन ब्राउन का संबंध भी उसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से तो नहीं है। फिलहाल पुलिस कोर्ट से रिमांड लेकर आगे की तफ्तीश में जुटी है।
