NEET Paper Leak: कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। रविवार को ग्वालियर में उन्होंने सीधे तौर पर इसके लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया और उनके इस्तीफे की मांग की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी संसदीय समितियों का सम्मान करते हैं, तो उन्हें धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाना चाहिए।
पेपर लीक की अधिकतर शिकायतें भाजपा शासित राज्यों से
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है। देश में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर शिकायतें भाजपा शासित राज्यों से सामने आ रही हैं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि शिक्षा संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कई सुझाव दिए थे,लेकिन एनटीए ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह कहकर संसदीय समिति की सिफारिशों को खारिज कर दिया कि समिति में विपक्षी दलों के सदस्य शामिल थे। सिंह ने कहा, “अगर प्रधानमंत्री संसदीय समितियों का सम्मान करते हैं, तो धर्मेंद्र प्रधान को हटाया जाना चाहिए।”
केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर साधा निशाना
दिग्विजय सिंह ने इस दौरान केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और पश्चिम एशिया संकट के बीच घोषित मितव्ययिता उपायों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री जनता से सोना न खरीदने की अपील कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार खुद बड़े पैमाने पर सोना खरीद रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जिससे ज्वेलर्स और इस व्यापार से जुड़े कारीगर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब कच्चे तेल की कीमतें घटीं तब केंद्र सरकार ने जनता को राहत नहीं दी।
जीएसटी को लेकर भी कसा तंज
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने केंद्रीय उत्पाद शुल्क के जरिए 45 लाख करोड़ रुपये वसूले हैं। उन्होंने नोटबंदी को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि इससे छोटे कारखाने बंद हुए और अमीर-गरीब के बीच की खाई और बढ़ गई।
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी,लेकिन अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद NTA ने परीक्षा रद्द कर दी। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा के लिए करीब 23 लाख छात्रों ने पंजीकरण कराया था और यह 551 भारतीय शहरों के साथ 14 विदेशी केंद्रों पर आयोजित की गई थी।
