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NDA Vs INDIA: किसके गठबंधन में कितना है दम? कौन-कौन सी पार्टियां किसके साथ; जानिए सबकुछ

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 18, 2023, 07:59 PM IST

NDA Vs INDIA: भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थापना 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। जब यह गठबंधन बना था, उस समय इसमें 14 दल शामिल थे। हालांकि, साल-दर-साल एनडीए का कुनबा बढ़ता ही जा रहा है।

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NDA Vs INDIA

NDA Vs INDIA: देश की बदलती सियासत के लिए आज का दिन काफी महत्वपूर्ण है। बेंगलुरू में एक तरफ विपक्षी एकता की बैठक खत्म हो चुकी है। इस बैठक में विपक्षी दलों के गठबंधन को नया नाम(INDIA) मिला है, तो दूसरी तरफ भाजपा के नेतृत्व वाला NDA भी दिल्ली में आज ही शक्ति प्रदर्शन कर रहा है।

विपक्ष की बैठक में जहां 26 दल शामिल हुए थे, तो भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दावा किया है कि आज हो रही बैठक में 38 दल शामिल हो रहे हैं। NDA के घटक दलों पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सवाल भी खड़े किए हैं, उन्होंने कहा है कि उन्होंने कहा है कि आज की विपक्ष की बैठक में 26 पार्टियों ने हिस्सा लिया है, यह देखकर NDA 36 पार्टियों के साथ बैठक कर रहा है। उन्होंने कहा, मुझे नहीं पता वो कौन सी पार्टियां हैं और वे रजिस्टर्ड भी हैं या नहीं। ऐसे में हम आपको बताएंगे कि NDA कब बना था? तब इसमें कितने दल शामिल थे? आज NDA शक्ति प्रदर्शन क्यों कर रहा है और कौन-कौन से दल आज की बैठक में शामिल हैं? आइए जानते हैं...

पहले बात विपक्ष की

बेंगलुरू में आज विपक्षी एकता की दूसरी बैठक थी। इससे पहले पटना में हुई बैठक में 16 दल साथ आए थे, लेकिन अब विपक्ष का कुनबा बढ़कर 26 दलों का हो गया है। विपक्षी दलों के गठबंधन को INDIA नाम दिया गया है, जिसका मतलब है- इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल एनक्यूजिव एलाइंस। इस गठबंधन में विपक्ष के जो दल शामिल हुए हैं, उनके नाम - कांग्रेस, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, आरजेडी, जदयू, सीपीआई, एनसीपी(शरद पवार गुट), शिवसेना(उद्धव ठाकरे), सीपीआई-एम, जेएमएम, समाजवादी पार्टी, डीएमके, केडीएमके, वीसीके, आरएसपी, सीपीआई-एमएल, फॉरवर्ड ब्लॉक, आईयूएमएल, केरल कांग्रेस, केरल कांग्रेस(मणि), अपना दल (कामोरावादी), मणिथानेया मक्कल काची (एमएमके), जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, नेशनल कॉफ्रेंस शामिल हैं।

अब जानिए कब बना था NDA

भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थापना 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। जब यह गठबंधन बना था, उस समय इसमें 14 दल शामिल थे। हालांकि, यह गठबंधन ज्यादा समय तक चल नहीं पाया और एक साल के अंदर ही टूट गया। इसके बाद 1999 में दोबारा एनडीए बनाया गया, तब इसमें 24 पार्टियां शामिल हुई थीं। इसके बाद से अब तक एनडीए ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं।

अब NDA की बैठक में शामिल 38 दल कौन से हैं?

एनडीए की एक बड़ी बैठक दिल्ली में हो रही है। दावा किया जा रहा है कि इस बैठक में 38 दल शामिल हैं। इसमें भाजपा, शिवसेना(एकनाथ शिंदे गुट), राष्ट्रीय लोक जन शक्ति पार्टी (पारस), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान), अपना दल (सोनेलाल), एनसीपी(अजित पवार), एआईएडीएमके, एनपीपी, एनडीपीपी, एसकेएम, आईएमकेएमके, आजसू, एमएनएफ, एनपीएफ, आरपीआई, जेजेपी, आईपीएफटी (त्रिपुरा), बीपीपी, पीएमके, एमजीपी, निषाद पार्टी, एजीपी, यूपीपीएल, एआईआरएनसी, टीएमसी(तमिल मनीला कांग्रेस), शिरोमणि अकाली दल संयुक्त, जनसेना, हम, रालोसप, सुभासपा, बीडीजेएस, केरल कॉग्रेस, गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट, जनातिपथ्य राष्ट्रीय सभा, यूपीडी, एचएसडीपी, जन सुराज पार्टी, प्रहार जनशक्ति पार्टी

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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