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महाराष्ट्र में खत्म होने के करीब है नक्सलवाद; सीएम देवेंद्र फडणवीस ने किया ये बड़ा दावा

Maharashtra: सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बड़ा दावा करते हुए ये कहा है कि महाराष्ट्र में नक्सलवाद खत्म होने के करीब है। फडणवीस ने विदर्भ क्षेत्र में स्थित जिले में 32 किलोमीटर लंबे गट्टा-गरदेवाडा-वांगेतुरी मार्ग और वांगेतुरी-गरदेवाडा-गट्टा-अहेरी मार्ग पर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की बस सेवा का उद्घाटन किया।

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देवेंद्र फडणवीस

CM Fadnavis Big Claims: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि राज्य नक्सलवाद से मुक्त होने की दिशा में बढ़ रहा है क्योंकि नक्सली पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर रहे हैं और प्रतिबंधित संगठन नए लोग शामिल नहीं हो रहे हैं। गढ़चिरौली के अपने दौरे के दौरान फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा कि जिले के दूरदराज के इलाकों में नक्सलियों का प्रभाव समाप्त हो रहा है और उन्होंने शीर्ष नक्सली काडर द्वारा हथियार डालने एवं आत्मसमर्पण करने के कदम का स्वागत किया।

फडणवीस का दावा- अब समाप्ति के करीब है नक्सलवाद

मुख्यमंत्री ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘नक्सलवाद अब समाप्ति के करीब है।’’ उन्होंने कहा कि सरकार ने माओवादियों के प्रभाव को खत्म करके गढ़चिरौली को ‘‘पहला जिला’’ बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि गढ़चिरौली को अक्सर महाराष्ट्र का अंतिम जिला कहा जाता है क्योंकि यह राज्य की पूर्वी सीमा पर स्थित है।

फडणवीस ने विदर्भ क्षेत्र में स्थित जिले में 32 किलोमीटर लंबे गट्टा-गरदेवाडा-वांगेतुरी मार्ग और वांगेतुरी-गरदेवाडा-गट्टा-अहेरी मार्ग पर महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (एमएसआरटीसी) की बस सेवा का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़चिरौली सरकार के लिए (प्राथमिकता सूची में) अंतिम नहीं, बल्कि ‘‘पहला जिला’’ है। उन्होंने कहा कि आज जिस सड़क संपर्क का उद्घाटन किया गया है, वह महाराष्ट्र को सीधे छत्तीसगढ़ से जोड़ेगा।

नक्सलवाद के खिलाफ गढ़चिरौली पुलिस के काम की सराहना

सीएम फडणवीस ने कहा कि इसके अलावा, क्षेत्र नक्सलियों के प्रभाव से मुक्त हो रहा है और लोगों को आजादी के 75 साल बाद एमएसआरटीसी बस सेवाएं मिल रही हैं। फडणवीस ने नक्सलवाद के खिलाफ गढ़चिरौली पुलिस के काम की सराहना की और कहा कि लोग अब नक्सलियों का समर्थन नहीं करते और ना ही कोई व्यक्ति प्रतिबंधित नक्सली संगठन में शामिल ही होना चाहता। उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत महत्वपूर्ण है।’’

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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