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अमेरिका के बराबर हो जाएगा बिहार का सड़क नेटवर्क; नितिन गडकरी ने बताया कब तक

Nitin Gadkari made a prediction about Bihar: मोदी सरकार में मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार की सड़कों को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए ये कहा है कि बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क 2029 तक अमेरिका के बराबर हो जाएगा। इसके अलावा गडकरी ने क्या कुछ कहा, आपको रिपोर्ट में बताते हैं।

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'बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क 2029 तक अमेरिका के बराबर हो जाएगा'

Bihar News: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि 2029 में जब भाजपा नीत राजग केंद्र की सत्ता में 15 साल पूरे करेगा, तब तक बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों का नेटवर्क अमेरिका के बराबर हो जाएगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे गडकरी ने बोधगया में लगातार दो कार्यक्रमों को संबोधित करते हुए यह बात कही।

बिहार का सड़क नेटवर्क अमेरिका के बराबर हो जाएगा

पूर्व भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'हमारी सरकार सड़क आधारभूत संरचना के मामले में तेजी से प्रगति कर रही है और यह बिहार में भी दिख रहा है। मैं वादा करता हूं कि मौजूदा पांच साल के कार्यकाल के बाद, जब हम सत्ता में 15 साल पूरे कर लेंगे, तो बिहार का सड़क नेटवर्क अमेरिका के बराबर हो जाएगा।'

3,700 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का किया उद्घाटन

गडकरी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार के सड़क नेटवर्क में जबरदस्त सुधार हुआ है और राजग सरकार आगे भी विकास के लिए काम करती रहेगी। उन्होंने इस अवसर पर 3,700 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। मंत्री ने कहा कि आज जिन परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया, उनमें राष्ट्रीय राजमार्ग-20 का बख्तियारपुर-रजौली खंड और रजौली से हल्दिया तक सड़क चौड़ीकरण शामिल है। इससे झारखंड और बिहार के बीच संपर्क बेहतर होगा और नवादा जिले के लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा।

बिहार के नौ शहरों में 11 रेल ओवर ब्रिज प्रोजेक्ट शामिल

गडकरी ने हसनपुर से बख्तियारपुर सड़क चौड़ीकरण खंड जिससे नालंदा और पटना जिलों के बीच यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, सहित कई अन्य परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। केंद्रीय मंत्री द्वारा घोषित अन्य परियोजनाओं में 5,100 करोड़ रुपये की लागत से 90 किलोमीटर लंबी मोकामा से मुंगेर सड़क का चौड़ीकरण और 1,250 करोड़ रुपये की लागत से नौ शहरों में 11 रेल ओवर ब्रिज शामिल हैं। गडकरी ने पटना में 10,000 करोड़ रुपये की लागत से ग्रीनफील्ड रिंग रोड की भी घोषणा की।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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