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क्या सचमुच एक राजनीतिक साजिश है नेशनल हेराल्ड मामला? आखिर कन्हैया कुमार ने किस आधार पर किया ये बड़ा दावा

कन्हैया कुमार ने दावा किया है कि नेशनल हेराल्ड मामला एक राजनीतिक साजिश है। आखिर कांग्रेस नेता ने ये दावा किस आधार पर किया है। उन्होंने कहा कि 'ईडी जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्ष की आवाज दबाना और बुनियादी मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना भाजपा का मुख्य एजेंडा है।'

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कन्हैया कुमार। (फाइल फोटो)

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने ‘नेशनल हेराल्ड’ से जुड़े कथित धन शोधन मामले को एक 'राजनीतिक साजिश' करार देते हुए सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर विपक्ष की आवाज दबाने और बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। कन्हैया ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भाजपा ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में पहले दिन से ही झूठ बोल रही है। उन्होंने दावा किया, 'नेशनल हेराल्ड से जुड़े धन शोधन मामले का कोई कानूनी आधार नहीं है... यह सीधे तौर पर एक राजनीतिक साजिश है।'

बुनियादी मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का आरोप

कांग्रेस नेता ने कहा, 'ईडी जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्ष की आवाज दबाना और बुनियादी मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाना भाजपा का मुख्य एजेंडा है।' उन्होंने कहा कि भाजपा समझ गई है कि जब तक यह (गांधी) परिवार है, कांग्रेस पार्टी है, तब तक संविधान को चकनाचूर करने का उसका मंसूबा पूरा नहीं हो सकता। ईडी ने हाल ही में ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ नयी दिल्ली की एक विशेष अदालत में आरोप पत्र दायर किया है, जिसमें उन पर 988 करोड़ रुपये के धन शोधन का आरोप लगाया गया है।

कन्हैया ने कहा, 'भाजपा ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में पहले दिन से ही झूठ बोल रही है। यह नया झूठ इसलिए फैलाया गया है, क्योंकि उसे (भाजपा को) समझ में आ गया है कि ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का उसका सपना साकार नहीं हो सकता, खासकर उस परिवार के रहते जिसने देश के लिए बलिदान दिया हो।' उन्होंने भाजपा पर अंग्रेजों की तरह अखबारों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा, '1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान अंग्रेजों ने इस अखबार (नेशनल हेराल्ड) को प्रतिबंधित कर दिया था। जब वे अंग्रेजों से नहीं डरे... तो आज क्या वे अंग्रेजों के जासूसों से डरेंगे?'

'एजेंसियों का हथियार के रूप में हो रहा इस्तेमाल'

कन्हैया ने भाजपा पर जांच एजेंसियों को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'ईडी अब ‘एंफोर्समेंट डायरेक्टरेट’ नहीं रहा, यह भाजपा का ‘एक्सटॉर्शन डिपार्टमेंट’ बन गया है। इसकी सजा दिलवाने की दर एक फीसदी भी नहीं है। यानी वह 100 लोगों के खिलाफ कार्रवाई करती है, लेकिन इनमें से एक को भी दोषी साबित कर सजा नहीं दिलवा पाती।'

कन्हैया ने दावा किया कि ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामला बेबुनियाद है, क्योंकि संबंधित कंपनियों के बीच पैसों का कोई लेनदेन नहीं हुआ। उन्होंने तर्क दिया, 'जिस कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है, वह वहां लागू होता है, जहां पैसों का लेनदेन हो। लेकिन इस मामले में पैसों का कोई लेनदेन नहीं हुआ।' कांग्रेस नेता ने कहा कि मामले में शामिल दोनों कंपनियां गैर-लाभकारी संगठन हैं। उन्होंने ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में संपत्ति के कथित दुरुपयोग के भाजपा के दावों पर भी सवाल उठाया।

कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने किया ये सवाल

कन्हैया ने सवाल किया, 'वे कहते हैं कि यह हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति है, लेकिन लखनऊ के कार्यालय को छोड़कर ‘नेशनल हेराल्ड’ की सारी संपत्तियां पट्टे पर हैं। ये ‘नेशनल हेराल्ड’ की निजी संपत्ति नहीं हैं। फिर राहुल गांधी या सोनिया गांधी को कैसे फायदा हुआ?' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा (गांधी) परिवार को बदनाम करने के लिए 'झूठ फैला रही है।'

कन्हैया ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वित्त पोषण के बारे में चुप्पी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, 'भाजपा-आरएसएस को हर शहर में कार्यालय बनाने के लिए पैसा कहां से मिला, इस बारे में सवाल क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं?'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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