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Mumbai Boat Accident: मुंबई नाव हादसे में एक और शव बरामद, मरने वालों की संख्या हुई 15; जानें हर अपडेट

Mumbai Boat Accident: मुंबई तट के निकट नौसेना के एक पोत के नौका से टकराने के बाद लापता 7 वर्षीय एक लड़के का शव शनिवार को बरामद कर लिया गया है। बीएमसी ने इसकी जानकारी साझा की है। अधिकारियों ने बताया कि शव मिल गया है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या अब 15 हो गई है।

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मुंबई नाव हादसा।

Boat Accident Updates: मुंबई तट के पास नौका और नौसैन्य पोत के बीच हुई टक्कर के बाद लापता हुए सात वर्षीय बच्चे का शव तीन दिन के तलाश अभियान के बाद शनिवार सुबह बरामद कर लिया गया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। नौसेना के एक अधिकारी ने कहा कि हालांकि तलाशी अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक नौका को सीधा खड़ा नहीं कर दिया जाता तथा यह पुष्टि नहीं हो जाती कि अब कोई अन्य शव नहीं बचा है। नौसैन्य नौकाओं ने जोहान मोहम्मद निसार अहमद पठान का शव बरामद कर लिया और इसी के साथ 18 दिसंबर को हुई दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई।

लापता 7 वर्षीय लड़के का शव मिला, मृतक संख्या 15 हुई

मुंबई नाव दुर्घटना से जुड़ा ताजा अपडेट सामने आया है। बीएमसी ने जानकारी साझा करते हुए ये बताया है कि गेटवे ऑफ इंडिया के पास नौसेना की नाव से टकराने के बाद 'नीलकमल' यात्री जहाज पलटने की घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई, बचाव दल द्वारा एक और शव बरामद किया गया।

यह शहर के बंदरगाह क्षेत्र में हुई सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक है और नौसेना ने इसकी जांच शुरू कर दी है। अधिकारी ने बताया कि लापता यात्रियों की तलाश के लिए नौसेना के एक हेलीकॉप्टर और नौसेना एवं तटरक्षक बल की नौकाओं को तैनात किया गया। पोत और नौका पर सवार 113 लोगों में से 15 की मौत हो गई और दो घायलों सहित 98 लोगों को बचा लिया गया। अधिकारी ने बताया कि नौसेना के पोत पर छह लोग सवार थे, जिनमें से दो बच गए।

कब और कैसे हुआ था ये नाव हादसा? जानें हर अपडेट

मुंबई तट के पास बुधवार को दोपहर के समय नौसेना के पोत ने इंजन परीक्षण के दौरान यात्री नौका ‘नील कमल’ को टक्कर मार दी थी। नौका 100 से अधिक यात्रियों को गेटवे ऑफ इंडिया से एलिफेंटा द्वीप ले जा रही थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड (एमएमबी) द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, नौका में 84 यात्रियों और चालक दल के छह सदस्यों के सवार होने की अनुमति थी, लेकिन इसमें क्षमता से अधिक यात्री सवार थे। स्वयं जांच कर रहे एमएमबी ने नौका का लाइसेंस रद्द कर दिया क्योंकि नौका में तय सीमा से अधिक लोग सवार थे और इस प्रकार यह अंतर्देशीय पोत अधिनियम का उल्लंघन है।

कोलाबा थाने में नौसैन्य पोत के चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना प्रभावित पोत नौसेना के कब्जे में है और जांच के लिए जब भी जरूरत होगी पुलिस इसकी मांग करेगी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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