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Mukhtar Ansari Family: दादा कांग्रेस अध्यक्ष-चाचा उपराष्ट्रपति; जानें माफिया मुख्तार अंसारी के परिवार में और कौन-कौन?

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 29, 2023, 01:37 PM IST

Mukhtar Ansari Family: मुख्तार अंसारी के दादा पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष तो नाना सेना में बिग्रेडियर थे। वहीं देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अली अंसारी मुख्तार के रिश्ते में चाचा लगते हैं। मुख्तार अंसारी पर 2007 में दर्ज गैंगेस्टर एक्ट के एक मामले में कोर्ट ने 10 साल की सजा का ऐलान किया है।

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मुख्तार अंसारी

Photo : BCCL

Mukhtar Ansari Family: माफिया अतीक अहमद के बाद अब मुख्तार अंसारी की बारी है। गाजीपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट 2007 में उसके खिलाफ दर्ज गैंगेस्टर एक्ट मामले में आज सजा का ऐलान कर दिया। उसे 10 साल की सजा सुनाई गई है। इस मामले में सुनवाई पहले ही पूरी हो चुकी है। बता दें, पहले इस केस में 15 अप्रैल को फैसला आना था, लेकिन तब पीठासीन अधिकारी के अनुपस्थित होने के कारण फैसले की तारीख 29 अप्रैल मुकम्मल की गई थी।

माफिया मुख्तार पर चर्चा इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि अतीक की तरह ही उसके गुनाहों की लिस्ट काफी लंबी है। कहा जाता है कि एक समय मुख्तार का खौफ इतना ज्यादा था कि वह जिस सड़क पर अपनी जीप पर सवार होकर निकलता, लोग रास्ता बदल देते। एक समय योगी आदित्यनाथ पर हमला करवाने में भी उसका नाम सामने आया था। हैरानी की बात तो यह है कि जहां मुख्तार की अपराधों की लिस्ट इतनी लंबी है, तो वहीं उसका पारिवारिक बैंकग्राउंड उतना ही मजबूत है। मुख्तार के पुरखे कांग्रेस अध्यक्ष से लेकर उपराष्ट्रपति और सेना में ब्रिगेडियर तक लोग रह चुके हैं। आइए जानते हैं उसके परिवार के बारे में...

पहले वह मामला, जिस पर सुनाई गई सजा

मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी के खिलाफ 2007 में गैंगेस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसी मामले में आज गाजीपुर की विशेष अदालत अपना फैसला सुनाने वाली है। इस केस में 2005 में कृष्णानंद राय हत्याकांडड और नंद किशोर रूंगटा अपहरण मामले को आधार बनाया गया था। मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है। बता दें, मुख्तार अंसारी और अफजाल अंसादी कृष्णानंद राय हत्याकांड और नंद किशोर रूंगटा केस में बरी हो चुके हैं, लेकिन दोनों के खिलाफ गैंगेस्टर में सजा का ऐलान हुआ है।

अब परिवार के बारे में जानिए

मुख्तार अंसारी के दादा डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी का जन्म 1880 में गाजीपुर में ही हुआ था। उन्होंने मद्रास से डॉक्टरी की ओर इसके बाद यूके से एमएस और एमडी की डिग्री ली। महात्मा गांधी से प्रभावित होकर वह कांग्रेस में शामिल हुए और उनका प्रभाव इतना ज्यादा था कि 1926-27 में कांग्रेस अध्यक्ष थी रहे। मुख्तार के दादा जामिया विश्वविद्यालय के फाउंडिंग मेंबर भी रहे हैं।

नाना सेना में ब्रिगेडियर, मिला महावीर चक्र

रिपोर्ट के अनुसार, माफिया मुख्तार के नाना मोहम्मद उस्मान भारतीय सेना में ब्रिगेडियर थे। वह तीन चुलाई 1948 को पाकिस्तार के खिलाफ जंग लड़ते हुए कश्मीर के नौशेरा में शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से भी नवाजा गया था। वहीं मुख्तार अंसारी के पिता सुभानउल्ला अंसारी भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे, वह एक साफ-सुथरी छवि के नेता थे।

चाचा सबसे ज्यादा समय तक रहे उपराष्ट्रपति

देश के सबसे लंबे समय तक उपराष्ट्रपति रहने वाले हामिद अंसारी भी मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं। हामित अंसारी विवादों में भी रहे। इसके अलावा मुख्तार के परिवार में उसका सांसद भाई अफजाल अंसारी और सिबकतुल्लाह अंसारी है, वह विधायक रह चुके हैं।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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