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दुनिया में सबसे ज्यादा 'बालिका वधू' भारत में, 8 राज्यों में बुरा हाल, सीधे होता है ये नुकसान

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 14, 2022, 01:34 PM IST

Child Marriage in India: भारत में दुनिया के एक तिहाई बालिका वधू हैं। ऐसे में बाल विवाह को खत्म करना अभी भी चुनौती बना हुआ है। इसमें भी देश के 8 राज्य ऐसे हैं, जहां पर बाल विवाह के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। भारत में 20-24 साल की उम्र की 23.3 फीसदी लड़कियां ऐसी हैं, जिनका विवाह 18 साल से कम उम्र में हो जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर: भारत में बाल विवाह

Photo : IANS
KEY HIGHLIGHTS
  • भारत में पिछले 17 साल में बाल विवाह के मामले तेजी से घटे हैं।
  • 15-19 साल में 53 फीसदी लड़कियां मां बन गई ।
  • UNFPA-UNICEF भारत सहित 12 देशों में चला रखा है विशेष कार्यक्रम

Children Day and Child Marriage in India: देश भर में बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। लेकिन एक हकीकत यह भी है कि भारत में हर साल करीब 15 लाख (UNICEF REPORT-2016) बच्चियों का बाल विवाह हो जाता है। यानी जब उन्हें पढ़ना चाहिए, अपने करियर पर फोकस करना चाहिए, उस दौरान वह विवाह के बंधन में बंध जाती है। भारत में दुनिया के एक तिहाई बालिका वधू हैं। ऐसे में बाल विवाह को खत्म करना अभी भी चुनौती बना हुआ है। इसमें भी देश के 8 राज्य ऐसे हैं, जहां पर बाल विवाह के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। इसमें पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा टॉप-3 में हैं। वहीं धर्म के आधार पर देखा जाय तो सबसे ज्यादा बाल विवाह मुस्लिम समुदाय में होते हैं। उसके बाद हिंदू समुदाय के लोगों में बाल विवाह किए जाते हैं। भारत में लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कियों के लिए 21 साल तय है। ऐसे में तय न्यूनतम उम्र सीमा से कम उम्र में विवाह बाल विवाह कहलाता है।

23.3 फीसदी लड़कियों और 17.7 लड़कों का बाल विवाह

संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठन यूनीसेफ द्वारा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5)के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 20-24 साल की उम्र की 23.3 फीसदी लड़कियां ऐसी हैं, जिनका विवाह 18 साल से कम उम्र में हो जाता है। वहीं 25-29 साल के 17.7 फीसदी लड़के ऐसे हैं, जिनका विवाह 21 साल से पहले कर दिया जाता है।

राज्य20-24 साल की लड़कियां जिनका बाल विवाह हुआ (फीसदी में)
पश्चिम बंगाल41.6
बिहार40.8
त्रिपुरा40.1
झारखंड32.2
असम31.8
आंध्र प्रदेश29.3
राजस्थान25.4
तेलंगाना23.5

स्रोत: NFHS-5

17 साल में 50 फीसदी घटा बाल विवाह

दुनिया में सबसे ज्यादा बालिका वधुओं का घर होने के बावजूद, भारत में पिछले 17 साल में बाल विवाह के मामले तेजी से घटे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2005-06 में जहां 47.4 फीसदी बच्चियों का बाल विवाह हो जाता था। वह 2019-21 में घटकर 23.3 फीसदी हो गया है। यानी बाल विवाह के मामलों में करीब 50 फीसदी की कमी आई है। हालांकि अगर देश में बाल विवाह के मामले धर्म और जाति के आधार पर देखे जाय, तो सबसे ज्यादा मुस्लिम धर्म में बाल विवाह होते हैं। इसके बाद हिंदू और ईसाई धर्म में बाल विवाह के मामले आते हैं। वहीं अगर जाति के आधार पर देखा जाय तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जान जाति में सबसे ज्यादा बाल विवाह होते हैं।

धर्म20-24 साल की लड़कियां जिनका बाल विवाह हुआ (फीसदी में)
मुस्लिम26
हिंदू23
ईसाई15
अन्य12

स्रोत: UNFPA

कम उम्र में मां बनने के मामले ज्यादा

रिपोर्ट के अनुसार जिन लड़कियों की 15-19 साल की उम्र में शादी हो गई , उनमें से 53 फीसदी लड़कियां मां बन गई है। यानी बेहद कम उम्र में लड़कियां मां बन जाती हैं। और इसका परिवार नियोजन पर सीधा असर दिखता है। इसके अलावा बाल विवाह का शिक्षा और गरीबी से भी सीधा कनेक्शन दिखता है। मसलन NFHS-5 के सर्वे के अनुसार 48 फीसदी अशिक्षित महिलाएं ऐसी थी, जिनका बाल विवाह हुआ है। इसी तरह जिन लड़कियों का बाल विवाह हुआ है, उसमें से 40 फीसदी गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवार से ताल्लुक रखती थी।

क्या होता है नुकसान

बाल विवाह के सामाजिक , आर्थिक और स्वास्थ्य के स्तर पर नुकसान होता है, इसे देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि बाल विवाह के मामते में तेजी से कमी लाई जाय।

  1. शिक्षा के स्तर में कमी
  2. लड़कियों के सेहत पर सीधा असर
  3. लैंगिक भेद और असमानता बढ़ती है
  4. कुशल लोगों की कमी
  5. अर्थव्यवस्था को नुकसान
  6. परिवार पर आर्थिक दबाव

भारत सहित इन 12 देशों में कार्यक्रम

साल 2016में UNFPA-UNICEF ने सरकारों के साथ मिलकर बाल विवाह को दुनिया से खत्म करने का कार्यक्रम शुरु किया है। इसके तहत उसने उन 12 देशों का चयन किया है, जहां पर सबसे ज्यादा बाल विवाह होते हैं। इस लिस्ट में भारत भी शामिल है। UNFPA-UNICEF ने बाल विवाह के खात्मे के लिए साल 2030 तक का लक्ष्य रखा है..

क्रम संख्यादेश
1भारत
2बांग्लादेश
3बुर्किना फासो
4इथोपिया
5घाना
6मोजाम्बिक
7नेपाल
8नाइजर
9सियरा लियोन
10युगांडा
11यमन
12जांबिया
स्रोत: UNICEF
प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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