Children Day and Child Marriage in India: देश भर में बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए 14 नवंबर को बाल दिवस मनाया जाता है। लेकिन एक हकीकत यह भी है कि भारत में हर साल करीब 15 लाख (UNICEF REPORT-2016) बच्चियों का बाल विवाह हो जाता है। यानी जब उन्हें पढ़ना चाहिए, अपने करियर पर फोकस करना चाहिए, उस दौरान वह विवाह के बंधन में बंध जाती है। भारत में दुनिया के एक तिहाई बालिका वधू हैं। ऐसे में बाल विवाह को खत्म करना अभी भी चुनौती बना हुआ है। इसमें भी देश के 8 राज्य ऐसे हैं, जहां पर बाल विवाह के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। इसमें पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा टॉप-3 में हैं। वहीं धर्म के आधार पर देखा जाय तो सबसे ज्यादा बाल विवाह मुस्लिम समुदाय में होते हैं। उसके बाद हिंदू समुदाय के लोगों में बाल विवाह किए जाते हैं। भारत में लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़कियों के लिए 21 साल तय है। ऐसे में तय न्यूनतम उम्र सीमा से कम उम्र में विवाह बाल विवाह कहलाता है।
23.3 फीसदी लड़कियों और 17.7 लड़कों का बाल विवाह
संयुक्त राष्ट्र संघ के संगठन यूनीसेफ द्वारा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5)के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 20-24 साल की उम्र की 23.3 फीसदी लड़कियां ऐसी हैं, जिनका विवाह 18 साल से कम उम्र में हो जाता है। वहीं 25-29 साल के 17.7 फीसदी लड़के ऐसे हैं, जिनका विवाह 21 साल से पहले कर दिया जाता है।
| राज्य | 20-24 साल की लड़कियां जिनका बाल विवाह हुआ (फीसदी में) |
| पश्चिम बंगाल | 41.6 |
| बिहार | 40.8 |
| त्रिपुरा | 40.1 |
| झारखंड | 32.2 |
| असम | 31.8 |
| आंध्र प्रदेश | 29.3 |
| राजस्थान | 25.4 |
| तेलंगाना | 23.5 |
स्रोत: NFHS-5
17 साल में 50 फीसदी घटा बाल विवाह
दुनिया में सबसे ज्यादा बालिका वधुओं का घर होने के बावजूद, भारत में पिछले 17 साल में बाल विवाह के मामले तेजी से घटे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2005-06 में जहां 47.4 फीसदी बच्चियों का बाल विवाह हो जाता था। वह 2019-21 में घटकर 23.3 फीसदी हो गया है। यानी बाल विवाह के मामलों में करीब 50 फीसदी की कमी आई है। हालांकि अगर देश में बाल विवाह के मामले धर्म और जाति के आधार पर देखे जाय, तो सबसे ज्यादा मुस्लिम धर्म में बाल विवाह होते हैं। इसके बाद हिंदू और ईसाई धर्म में बाल विवाह के मामले आते हैं। वहीं अगर जाति के आधार पर देखा जाय तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जान जाति में सबसे ज्यादा बाल विवाह होते हैं।
| धर्म | 20-24 साल की लड़कियां जिनका बाल विवाह हुआ (फीसदी में) |
| मुस्लिम | 26 |
| हिंदू | 23 |
| ईसाई | 15 |
| अन्य | 12 |
स्रोत: UNFPA
कम उम्र में मां बनने के मामले ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार जिन लड़कियों की 15-19 साल की उम्र में शादी हो गई , उनमें से 53 फीसदी लड़कियां मां बन गई है। यानी बेहद कम उम्र में लड़कियां मां बन जाती हैं। और इसका परिवार नियोजन पर सीधा असर दिखता है। इसके अलावा बाल विवाह का शिक्षा और गरीबी से भी सीधा कनेक्शन दिखता है। मसलन NFHS-5 के सर्वे के अनुसार 48 फीसदी अशिक्षित महिलाएं ऐसी थी, जिनका बाल विवाह हुआ है। इसी तरह जिन लड़कियों का बाल विवाह हुआ है, उसमें से 40 फीसदी गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवार से ताल्लुक रखती थी।
क्या होता है नुकसान
बाल विवाह के सामाजिक , आर्थिक और स्वास्थ्य के स्तर पर नुकसान होता है, इसे देखते हुए यह बेहद जरूरी है कि बाल विवाह के मामते में तेजी से कमी लाई जाय।
- शिक्षा के स्तर में कमी
- लड़कियों के सेहत पर सीधा असर
- लैंगिक भेद और असमानता बढ़ती है
- कुशल लोगों की कमी
- अर्थव्यवस्था को नुकसान
- परिवार पर आर्थिक दबाव
भारत सहित इन 12 देशों में कार्यक्रम
साल 2016में
| क्रम संख्या | देश |
| 1 | भारत |
| 2 | बांग्लादेश |
| 3 | बुर्किना फासो |
| 4 | इथोपिया |
| 5 | घाना |
| 6 | मोजाम्बिक |
| 7 | नेपाल |
| 8 | नाइजर |
| 9 | सियरा लियोन |
| 10 | युगांडा |
| 11 | यमन |
| 12 | जांबिया |
