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'फडणवीस या अजित पवार के कहने पर दे दूंगा इस्तीफा', महाराष्ट्र सरकार के इस मंत्री ने किया बड़ा ऐलान

Dhananjay Munde Ready for Resign: क्या महाराष्ट्र सरकार में मंत्री धनंजय मुंडे इस्तीफा देने वाले है? उन्होंने खुद ये कहा है कि फडणवीस या उपमुख्यमंत्री अजित पवार के कहने पर इस्तीफा देने को तैयार हूं। वहीं सुप्रिया सुले ने कहा है कि महाराष्ट्र सरपंच हत्याकांड मामले में धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना चाहिए।

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इस्तीफा देने के लिए तैयार है महाराष्ट्र के मंत्री धनंजय मुंडे।

Maharashtra Politics: बीड में सरपंच की हत्या मामले में विपक्ष द्वारा इस्तीफे की मांग के बीच महाराष्ट्र कैबिनेट के सदस्य धनंजय मुंडे ने बुधवार को कहा कि यदि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस या उपमुख्यमंत्री अजित पवार कहेंगे तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ सदस्य मुंडे, अपने गृह जिले बीड के मासाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख के अपहरण-हत्या के बाद से आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं।

इस्तीफा देने को तैयार हैं मंत्री धनंजय मुंडे

मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड को हत्या से जुड़े जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किया गया है। मुंडे ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "अगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस या उपमुख्यमंत्री अजित पवार मानते हैं कि मैं दोषी हूं, तो उन्हें मुझसे इस्तीफा मांग लेना चाहिए। मैं पद छोड़ने के लिए तैयार हूं। यह उन्हें तय करना है कि मैं दोषी हूं या नहीं। मुझे पिछले 51 दिनों से निशाना बनाया जा रहा है।" खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के इस्तीफे की मांग तब फिर से उठने लगी है, जब सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने दावा किया कि उन्होंने उनके खिलाफ पार्टी अध्यक्ष अजित पवार को "सबूत" सौंपे हैं। अजित पवार ने अब तक अपनी पार्टी और कैबिनेट सहयोगी का पुरजोर समर्थन किया है।

हालांकि, मुंडे ने नैतिक आधार पर मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की संभावना को खारिज कर दिया। बीड जिले के परली से विधायक ने कहा, "मेरी नैतिकता मेरे लोगों के प्रति मेरी ईमानदारी में निहित है। मैं पूरी ईमानदारी से बोलता हूं। मैं खुद को नैतिक रूप से दोषी नहीं मानता। अगर मैं दोषी हूं, तो मेरे वरिष्ठ नेता मुझे बताएंगे।" इससे पहले दिन में राकांपा (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा था कि मुंडे को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।

सरपंच की हत्या से जुड़ा क्या है मामला?

मध्य महाराष्ट्र के बीड जिले में एक ऊर्जा कंपनी को निशाना बनाकर की जा रही जबरन वसूली की कोशिश को रोकने का कथित तौर पर प्रयास करने पर सरपंच देशमुख का नौ दिसंबर को अपहरण कर लिया गया, उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने हत्या के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कराड को जबरन वसूली के मामले में हिरासत में लिया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में है। उस पर संगठित अपराध निरोधक कानून (मकोका) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना चाहिए: सुले

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने बुधवार को कहा कि बीड सरपंच हत्या मामले को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे धनंजय मुंडे को ‘नैतिकता के आधार’ पर मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। यहां पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मासाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की जघन्य हत्या को 50 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मुंडे के करीबी सहयोगी पर उंगलियां उठने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार से राकांपा मंत्री को बर्खास्त नहीं किया गया है। मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड को हत्या से जुड़े जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किया गया है। मुंडे वर्तमान में देवेंद्र फडणवीस नीत मंत्रिमंडल में खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग संभाल रहे हैं।

पुलिस के अनुसार मासाजोग के सरपंच संतोष देशमुख को नौ दिसंबर को बीड जिले में एक ऊर्जा कंपनी से जबरन वसूली की कोशिश को रोकने का प्रयास करने को लेकर अगवा कर लिया गया, उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। कराड को जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किया गया है और वह न्यायिक हिरासत में है। उन्होंने कहा, ‘‘अनिल देशमुख ने 100 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोप लगने के बाद गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। नवाब मलिक, छगन भुजबल को अफवाहों के आधार पर गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया।’’ अनिल देशमुख, शरद पवार की पार्टी राकांपा (एसपी) से हैं, भुजबल और मलिक उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पार्टी राकांपा से हैं। धनंजय मुंडे भी अजित पवार की पार्टी से हैं।

बारामती की सांसद सुले ने दावा किया कि सत्तारूढ़ भाजपा नीत महायुति गठबंधन के नेता भी चाहते थे कि मुंडे इस्तीफा दे दें। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं मंत्री होती और मेरी पार्टी 50 दिनों तक इस तरह सुर्खियों में रहती तो मैं नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देती। मैं पीछे हट जाती और अपनी पार्टी से कहती कि मैं पार्टी को आगे बढ़ाने में मदद करने के लिए आई हूं, न कि अपनी पार्टी को इस तरह नुकसान पहुंचाते हुए देखना चाहती हूं।’’ सुले ने कहा, ‘‘लाभ का पद संबंधी आरोपों के बाद सोनिया गांधी ने तुरंत इस्तीफा दे दिया था। वह मंत्री भी नहीं थीं।’’ कांग्रेस नेता एवं तत्कालीन सांसद सोनिया गांधी पर आरोप था कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्ष होने के नाते वह लाभ के पद पर है। आरोप लगाने के बाद सोनिया गांधी ने 2006 में सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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