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कौन है बिट्टू तबाही? कचरे में पटी नदी को 'जिंदा' करने वाले शख्स को मिला नीदरलैंड से नौकरी का ऑफर

20 वर्षीय सुरेन्द्र सिंह चौधरी मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले स्थित ब्यावरा के निवासी हैं और बी.एससी के छात्र हैं। उन्होंने 26 जनवरी 2026 से अपने गृहनगर की दूषित अजनार नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया था।

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बिट्टू तबाही का मिशन (फोटो- @PicturesFoIder)

Bittu Tabahi- मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में एक बेहद प्रदूषित नदी को साफ करने वाले 21 वर्षीय युवक के असाधारण प्रयास ने अब प्रेरणा की कहानी का रूप ले लिया है। पूरे देश में इस युवक की चर्चा है और उसकी कोशिशों की जमकर तारीफ हो रही है। सुरेंद्र सिंह चौधरी, जो ऑनलाइन बिट्टू तबाही के नाम से जाने जाते हैं, हाल ही में अजनार नदी की सफाई के लिए सुर्खियों में आए हैं। उनके प्रयासों ने न केवल प्रशंसा बटोरी, बल्कि एक डच गैर सरकारी संगठन से उन्हें नौकरी का प्रस्ताव भी मिला। यह प्रस्ताव नीदरलैंड स्थित पर्यावरण संगठन 'द ओशन क्लीनअप' के संस्थापक और सीईओ बोयान स्लाट की ओर से आया।

बिट्टू तबाही का मिशन

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले 20 वर्षीय युवा सुरेन्द्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर 'बिट्टू तबाही' (Bittu Tabahi) के नाम से जाना जाता है, अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। गंदगी से पटी अजनार नदी (Ajnar River) को अकेले साफ करने का उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, नीदरलैंड की प्रमुख पर्यावरण संस्था 'द ओशन क्लीनअप' (The Ocean Cleanup) के संस्थापक और सीईओ बोयन स्लैट (Boyan Slat) ने उन्हें अपनी संस्था में काम करने का सीधा ऑफर दिया है।

कैसे मिला नीदरलैंड्स से जॉब का ऑफर?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने बिट्टू तबाही द्वारा अजनार नदी की सफाई से जुड़ी तस्वीरें और जानकारी साझा की थी। तस्वीरों में नदी की सफाई से पहले और बाद का हैरान कर देने वाला बदलाव साफ दिखाई दे रहा था। इस पोस्ट को देखकर डच पर्यावरणविद् और आविष्कारक बोयन स्लैट इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा— हमारे साथ काम करने आ जाओ।

कौन हैं बिट्टू तबाही और क्या है उनका मिशन?

20 वर्षीय सुरेन्द्र सिंह चौधरी मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले स्थित ब्यावरा के निवासी हैं और बी.एससी के छात्र हैं। उन्होंने 26 जनवरी 2026 से अपने गृहनगर की दूषित अजनार नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया था। शुरुआती दिनों में कुछ दोस्तों ने उनका साथ दिया, लेकिन काम कठिन होने के कारण वे पीछे हट गए। इसके बाद सुरेन्द्र ने हार नहीं मानी और अकेले ही गंदे पानी, जहरीली काई और प्लास्टिक कचरे के बीच उतरकर सफाई शुरू की। सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरेन्द्र ने नदी के विभिन्न घाटों को साफ करने के लिए अपने निजी पैसे से करीब 30,000 रुपये खर्च किए और 3 महीने से अधिक की लगातार मेहनत से नदी का कायाकल्प कर दिया।

आनंद महिंद्रा भी कर चुके हैं तारीफ

सुरेन्द्र को शुरुआत में कई लोगों ने यह कहकर ट्रोल किया था कि वह सिर्फ सोशल मीडिया पर 'व्यूज' और 'लाइक्स' पाने के लिए सफाई का ड्रामा कर रहे हैं। हालांकि, देश के दिग्गज उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने मार्च 2026 में उनकी सराहना करते हुए X पर लिखा था - अगर 'लाइक्स' पाने की चाहत समाज के भले का जरिया बन सकती है, तो मुझे इससे कोई परहेज नहीं है। ब्यावरा के बिट्टू तबाही मेरे #MondayMotivation हैं।

क्या है 'द ओशन क्लीनअप'?

'द ओशन क्लीनअप' नीदरलैंड की एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) है, जो दुनिया भर के महासागरों और नदियों से प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने के लिए आधुनिक तकनीक विकसित करती है। संस्था का लक्ष्य साल 2040 तक समुद्र में तैरने वाले 90% प्लास्टिक कचरे को साफ करना है।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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