देश

भारत जोड़ो यात्रा में महबूबा और अब्दुल्ला बुलाए गए, कश्मीरी हिंदुओं को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला? Watch Video

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 19, 2023, 11:09 PM IST

Sawal Public Ka: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जम्मू-कश्मीर पहुंच गई है। इस यात्रा में फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती बुलाए गए हैं। कश्मीरी हिंदुओं को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला?

Image

भारत जोड़ो यात्रा में महबूबा और अब्दुल्ला बुलाए गए, कश्मीरी हिंदुओं को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला? Watch Video

Sawal Public Ka: कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा अब आखिरी दौर में पहुंच गई है। यात्रा आज जम्मू के कठुआ पहुंची। लेकिन राहुल की ये यात्रा जब आज जम्मू-कश्मीर तक पहुंची है तब 2 बड़े मुद्दे उठ रहे हैं। पहला मुद्दा ये कि आज 19 जनवरी है और आज से 33 साल पहले आज ही के दिन कश्मीर से हिंदुओं का सामूहिक पलायन हुआ था। भारत जोड़ो में अब्दुल्ला और महबूबा हैं लेकिन कश्मीरी हिंदू कहां हैं? लोग ये सवाल पूछ रहे हैं। और दूसरा मुद्दा ये कि श्रीनगर के लाल चौक पर अगर राहुल गांधी तिरंगा फहरा देंगे तो क्या वो RSS के एजेंडे में शामिल हो जाएंगे? सवाल पब्लिक का है कि सामूहिक पलायन के 33 साल बाद भी क्या भारत जोड़ो में कश्मीरी हिंदुओं की जगह नहीं है? कश्मीर का लाल चौक पूरे हिंदुस्तान का या सिर्फ RSS का? क्या लाल चौक पर तिरंगा फहराने से राहुल गांधी डरते हैं? यही है सवाल पब्लिक का।

कश्मीर में लाल चौक बेहद संवेदनशील जगह मानी जाती रही है। खासकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की शुरूआत के बाद। अलगाववादियों ने दशकों तक श्रीनगर के इस लाल चौक को अपने देश विरोध का ग्राउंड जीरो बना कर रखा था। 5 अगस्त 2019 को आर्टिकल 370 के खत्म होने के बाद लाल चौक वैसा नहीं रहा जो आतंकवाद के दौर में हुआ करता था। इसकी गवाही 2021 में स्वतंत्रता दिवस के पहले की ये तस्वीरें दे रही हैं।

पूरा लाल चौक तिरंगे की रोशनी में नहाया था। आप यूं कह लें कि लाल चौक का रंग ही बदलकर तिरंगा हो गया था। लेकिन उसी लाल चौक पर तिरंगा फहराने को RSS का एजेंडा बताकर 2 दिनों पहले कैसे खारिज किया गया। सुनिए जम्मू-कश्मीर कांग्रेस की प्रभारी रजनी पाटिल ने क्या कहा था?

राहुल गांधी लाल चौक जाकर ही तिरंगा फहराएं। मुद्दा ये नहीं है। लेकिन लाल चौक का सवाल इसीलिए उठा क्योंकि ये बात लंबे समय से पब्लिक डोमेन में थी कि राहुल गांधी लाल चौक पर तिरंगा फहराएंगे। ऐसे में लाल चौक पर तिरंगा फहराने को RSS का एजेंडा बताकर खारिज करने की वजहें क्या हो सकती हैं ?

क्या इसलिए क्योंकि पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला राहुल गांधी के भारत जोड़ो के यात्री बन रहे हैं? आपको याद दिला दूं कि आर्टिकल 370 के खात्मे से पहले महबूबा मुफ्ती ने धमकी दी थी कि कश्मीर में कोई तिरंगा लेकर चलने वाला नहीं बचेगा।

महबूबा ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के स्वागत में जो पोस्टर निकाला उसमें भी कहीं तिरंगा नहीं। उसमें कहीं भारत का नक्शा भी नहीं। उसमें सिर्फ अगस्त 2019 से पहले वाले जम्मू-कश्मीर का नक्शा है।

महबूबा और फारूक अब्दुल्ला की पाकिस्तान परस्ती किसी से छिपी नहीं है। सुनिए, भारत जोड़ो में शामिल होने जा रहे फारूक अब्दुल्ला लाल चौक पर तिरंगा फहराने से लेकर पाकिस्तान से बातचीत के मुद्दे पर कह क्या रहे हैं।

फारूक अब्दुल्ला पाकिस्तान की हिमायत करते हैं। लाल चौक पर तिरंगा फहराने के सवाल पर कोई लाइन लेते नहीं दिखते। लेकिन कश्मीरी हिंदुओं के सवाल पर मोदी सरकार पर उंगली उठाने लगते हैं। मैं पूछना चाहती हूं कि 1990 में कश्मीरी हिंदुओं के सामूहिक पलायन के 1 दिन पहले तक जम्मू-कश्मीर का मुख्यमंत्री कौन था?

जब कश्मीर जल रहा था। कश्मीरी हिंदुओं के जान पर बन आई थी। 18 जनवरी 1990 को इस्तीफा देकर फारूक अब्दुल्ला ही तो चलते बने थे। आज 19 जनवरी की ये तारीख 33 साल पहले कश्मीरी हिंदुओं के सामूहिक पलायन की ही नहीं हिंदुस्तान के सामूहिक शर्म की भी तारीख है। कश्मीर का लाल चौक कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ जुल्म का गवाह बना था। तो वहां तिरंगा फहराने में आखिर हर्ज क्या है? ये बात सच है कि BJP और RSS ने लाल चौक को अपने राष्ट्रवादी मिशन में शामिल किया है।

1992 में वरिष्ठ बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी के साथ उस समय एक युवा साथी के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BJP की एकता यात्रा का समापन लाल चौक पर तिरंगा फहरा कर किया था। लेकिन लाल चौक पर तिरंगा फहराने से आतंकवादियों और अलगाववादियों को भारत के स्वाभिमान का संदेश देना क्या RSS का एजेंडा कहलाएगा ? 1992 में लाल चौक पर तिरंगा फहराने को लेकर एक बार नरेंद्र मोदी ने खुद ये बात कही थी।

सवाल पब्लिक का

1. क्या कश्मीर के लाल चौक पर राहुल गांधी का तिरंगा नहीं फहराने का प्लान महबूबा और अब्दुल्ला का दबाव है?

2. भारत जोड़ो में महबूबा और अब्दुल्ला बुलाए गए, कश्मीरी हिंदुओं को प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला?

3. क्या आर्टिकल 370 के खात्मे से लाल चौक जैसी जगहों से चलने वाला अलगाववादी एजेंडा ध्वस्त हुआ ?

4. लाल चौक हिन्दुस्तान की शान..उसे RSS से जोड़ना कहां तक सही ?

टाइम्स नाउ नवभारत
टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलauthor

अक्टूबर 2017 में डिजिटल न्यूज़ की दुनिया में कदम रखने वाला टाइम्स नाउ नवभारत अपनी एक अलग पहचान बना चुका है। अपने न्यूज चैनल टाइम्स नाउ नवभारत की सोच एवं नजरिए के साथ आगे बढ़ते हुए यह न्यूज़ प्लेटफॉर्म आम लोगों से जुड़े मुद्दों का गहराई से विश्लेषण एवं उसे आसान भाषा में पेश करता आया है। राजनीति से लेकर खेल, मनोरंजन, कारोबार और आम लोगों के जीवन पर असर डालने वालीं खबरों का मायने समझाते हुए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म लोगों के भरोसे पर खरा उतरा है। \n\nसाथ ही यह अपने न्यूज़ चैनल पर दिखाए जाने वाली खबरों, शोज, स्पशेल कार्यक्रमों एवं रिपोर्टों को पेश करता है। चैनल के ये कार्यक्रम एवं शोज देश-दुनिया के घटनाक्रमों पर एक नया एवं विश्वसनीय नजरिया देते हैं। अपनी खबरों एवं विश्लेषण के चलते पसंदीदा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बन चुका टाइम्स नाउ नवभारत, डिजिटल लोगों के भरोसे को लगातार मजबूत कर रहा है।

और पढ़ें
End of Article