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अब भी सुलग रहा मणिपुर: फिर बढ़ाया गया इंटरनेट पर बैन, 50 हजार से ज्यादा विस्थापित; कैंपों में कट रही जिंदगी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 12, 2023, 07:08 AM IST

Manipur Violence: राज्य सरकार की ओर से नए आदेश के तहत पूरे राज्य में ब्रॉडबैंड समेत मोबाइल डेटा सेवाओं को 15 जून दोपहर तीन बजे तक प्रतिबंधित कर दिया गया है। बता दें, मणिपुर में तीन जून को हिंसा भड़की थी, जिसके बाद यहां इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

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मणिपुर में फिर बढ़ा इंटरनेट पर प्रतिबंध

Photo : AP

Manipur Violence: हिंसाग्रस्त मणिपुर में इंटरनेट पर प्रतिबंध एक बार फिर से बढ़ाया गया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा उस याचिका को खारिज किए जाने के बाद आया है, जिसमें राज्य में बार-बार इंटरनेट पर प्रतिबंध के खिलाफ तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। राज्य के दो नागरिकों की ओर से यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई थी। राज्य सरकार की ओर से नए आदेश के तहत पूरे राज्य में ब्रॉडबैंड समेत मोबाइल डेटा सेवाओं को 15 जून दोपहर तीन बजे तक प्रतिबंधित कर दिया गया है।

इस आदेश के बाद, मणिपुर के नागरिक करीब एक महीने से ज्यादा समय से बिना इंटरनेट रहने को मजबूर हैं। बता दें, मणिपुर में तीन जून को हिंसा भड़की थी, जिसके बाद यहां इंटरनेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके बाद से अब तक राज्य में पूरी तरह शांति व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई है।

50 हजार से ज्यादा विस्थापित

मणिपुर में दो समुदायों मेइती और कुकी के बीच छिड़े संघर्ष के बाद से अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं और राहत कैंपों में रह रहे हैं। एक अधिकारिक बयान में कहा गया है कि जातीय हिंसा के कारण से कुल 50,698 लोग विस्थापित होकर 349 राहत कैंपों में रहने को मजबूर हैं। उधर, मणिपुर के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री डॉ. आरके रंजन का कहना है कि सभी जिलों में तलाशी अभियान भी शुरू किया गया है। इस बीच, जिला और क्लस्टर नोडल अधिकारियों को विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की देखभाल करने को कहा गया है।

करीब 100 लोगों की हुई मौत

मणिपुर में हुई हिंसा में अब तक करीब 100 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हिंसा में करीब 310 घायल भी हुए हैं। राज्य में हिंसा की जांच के लिए सीबीआई ने डीआईजी-रैंक अधिकारी की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। वहीं, सीबीआई जांच की निगरानी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच आयोग द्वारा की जाएगी। इस आयोग का गठन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हिंसा प्रभावित राज्य के दौरे के बाद किया गया था। इसके अलावा मणिपुर की राज्यपाल की अध्यक्षता में एक शांति समिति का भी गठन किया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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