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भवानीपुर की हार को ममता बनर्जी ने दी चुनौती, याचिका दायर करने पहुंचीं कलकत्ता हाईकोर्ट; CM शुभेंदु से मिली थी शिकस्त

तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने हालिया विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट के नतीजों को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दाखिल की है। याचिका दाखिल करने के बाद वह सांसद डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेना और कल्याण बनर्जी के साथ कोर्ट परिसर से बाहर निकलती दिखाई दीं। इस चुनाव में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,104 वोटों से हराया था। मतगणना के दौरान कुछ समय के लिए काउंटिंग भी रोकी गई थी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके एजेंटों को अंदर नहीं जाने दिया गया, सीसीटीवी बंद किए गए और केंद्रीय बलों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया।

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विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट से मिली हार को ममता बनर्जी ने हाई कोर्ट में दी चुनौती। AI IMAGE

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट के चुनावी नतीजों को चुनौती देते हुए कोलकाता हाई कोर्ट में एक चुनावी याचिका (Election Petition) दायर की है। याचिका दाखिल करने के बाद ममता बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए देखा गया। ममता बनर्जी के साथ सांसद डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेना और कल्याण बनर्जी मौजूद थे। ममता बनर्जी, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने कोर्ट पहुंचीं थीं।

शुभेंदु अधिकारी ने 15, 104 वोटों से दी मात

बता दें कि शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15, 104 वोटों से मात दी थी। इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी को 73917 और ममता बनर्जी को 58812 वोट मिले थे। तीसरे स्थान पर रहे सीपीएम के श्रीजीब विश्वास को 3556 वोट मिले थे। चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी मतगणना के दिन 16-17 राउंड तक आगे थीं, लेकिन दोनों उम्मीदवारों के बीच गैप धीरे-धीरे कम होता गया। आखिरकार शुभेंदु अधिकारी ने 15, 104 वोट से चुनाव में बाजी मार ली।

जब रोकी गई थी काउंटिंग

हालांकि, एक समय काउंटिंग को रोका भी गया था। दोपहर को भवानीपुर के मतगणना केंद्र सखावत मेमोरियल स्कूल में कुछ समय के लिए काउंटिंग रोक दी गई थी। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार एक व्यक्ति मोबाइल फोन लेकर अंदर दाखिल हो गया था, जिसकी वजह से अस्थायी रूप से काउंटिंग को रोक दी गई थी।

ममता बनर्जी ने क्या लगाया आरोप?

वहीं, ममता बनर्जी खुद मतगणना केंद्र पर पहुंची थीं। वहीं, ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि उनके एजेंटे को अंदर जाने से रोका गया। सीसीटीव बंद कर दिए गए और केंद्रीय बलों ने टीएमसी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार भी किया। यहां तक की उनके साथ भी धक्का-मुक्की की गई।

टीएमसी में बगावत की कहानी

बता दें कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी के भीतर अभूतपूर्व राजनीतिक विद्रोह देखने को मिला है, हालांकि कानूनी पेचीदगियों के कारण बागी विधायकों और सांसदों ने अपने पदों से इस्तीफा नहीं दिया है। दरअसल, भारत में लागू सख्त 'दल-बदल विरोधी कानून' के तहत व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा देने या पार्टी छोड़ने पर सदस्यता तुरंत रद्द हो जाती है और उन सीटों पर दोबारा उपचुनाव कराने पड़ते, जिससे बचने के लिए बागी धड़े ने एक सोची-समझी कानूनी रणनीति अपनाई।

इस बगावत के तहत लोकसभा के कुल 28 टीएमसी सांसदों में से 20 बागी सांसदों (जैसे सुदीप बंदोपाध्याय, काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी राय) ने एक साथ मिलकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की और पहले से पंजीकृत राजनीतिक दल NCPI (नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया) में अपने विलय की घोषणा कर दी। चूंकि यह संख्या कुल सांसदों की आवश्यक दो-तिहाई (2/3) विधायी सीमा को पूरा करती है, इसलिए कानूनन यह एक वैध विलय माना गया और उनकी संसद सदस्यता पूरी तरह सुरक्षित रही।

इसी तरह, पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से करीब 60 विद्रोही विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विधानसभा स्पीकर के समक्ष खुद को एक अलग विधायी दल के रूप में मान्यता देने की मांग की और निष्कासित नेता रितब्रत बनर्जी को सदन में अपना नया नेता प्रतिपक्ष चुन लिया, जिससे बिना इस्तीफा दिए ही टीएमसी का एक बहुत बड़ा धड़ा कानूनी सुरक्षा कवच के साथ पार्टी से अलग हो गया है।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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