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फडणवीस-शिंदे के बीच क्या सचमुच है मतभेद? संजय राउत ने किया अजब गजब दावा

Maharashtra Politics: क्या महाराष्ट्र की सियासत में कोई नया उलटफेर होने वाली है? संजय राउत ने दावा किया है कि देवेंद्र फडणवीस और एक शिंदे के बीच ‘मतभेद' से महाराष्ट्र का विकास प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मंत्री गणेश नाइक को पड़ोसी पालघर जिले का प्रभारी मंत्री नियुक्त करना कथित तौर पर इसी रणनीति का हिस्सा है।

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संजय राउत का दावा- शिंदे और फडणवीस के बीच खटपट।

Mumbai: शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने रविवार को दावा किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच 'तनावपूर्ण संबंध' राज्य की प्रगति में बाधा डाल रहे हैं। राउत ने शिवसेना (उबाठा) के मुखपत्र ‘सामना’ में अपने साप्ताहिक स्तंभ ‘रोकठोक’ में दावा किया कि शिंदे अभी तक इस तथ्य को स्वीकार नहीं कर पाए हैं कि नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद पुन: नहीं दिया गया और वह इस पद को फिर से हासिल करने की बेहद कोशिश कर रहे हैं और फडणवीस इससे अच्छी तरह से वाकिफ हैं।

फडणवीस और शिंदे के बीच क्या चल रही है खटपट?

पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिंदे नीत शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा से मिलकर बनी ‘महायुति’ ने राज्य की 288 सीट में से 230 सीट जीती थीं। राज्यसभा सदस्य ने आरोप लगाया, 'मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और भाजपा समर्थित उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बीच अब कोई बातचीत नहीं होती और जनता के लिए यह मनोरंजन का विषय बन गया है।' राउत ने दावा किया कि इस 'मतभेद' से महाराष्ट्र सरकार का कामकाज प्रभावित हुआ है।

उन्होंने कहा, 'बहुमत होने के बावजूद प्रशासन पंगु बना हुआ है। जो लोग विश्वासघात करके आगे बढ़ते हैं वे अक्सर इससे ही गिरते हैं। शिंदे पर हमले शुरू हो गए हैं और महाराष्ट्र अनिश्चितता तथा अव्यवस्था की स्थिति में आ गया है।' राउत ने यह भी दावा किया कि शिंदे के राजनीतिक क्षेत्र ठाणे पर उनका नियंत्रण भाजपा व्यवस्थित रूप से कम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा मंत्री गणेश नाइक को पड़ोसी पालघर जिले का प्रभारी मंत्री नियुक्त करना कथित तौर पर इसी रणनीति का हिस्सा है।

'शिंदे को लगता है कि भाजपा ने उन्हें धोखा दिया है'

संजय राउत ने स्तंभ में लिखा, 'नाइक पहले शिवसेना-भाजपा सरकार में मंत्री थे जबकि शिंदे सिर्फ एक नगर पार्षद थे। वह शिंदे से आदेश नहीं लेंगे।' दरअसल नाइक ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह चाहते हैं कि भाजपा ठाणे में फले-फूले, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों सहयोगी दलों के बीच खींचतान है। राउत के अनुसार सरकार में शिंदे की भूमिका काफी कम हो गई है और वह अक्सर मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठकों से अनुपस्थित रहते हैं या जब आते भी हैं तो काफी देर से आते हैं।

उन्होंने दावा किया, '30 जनवरी को वह ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ में जिला योजना समिति की बैठक में ढाई घंटे देरी से पहुंचे।' राउत ने आरोप लगाया कि शिंदे को लगता है कि भाजपा नेतृत्व ने उन्हें धोखा दिया है। शिवसेना के एक वरिष्ठ विधायक के हवाले से राउत ने दावा किया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिंदे को आश्वासन दिया था कि 2024 का विधानसभा चुनाव उनके नेतृत्व में लड़ा जाएगा और वह मुख्यमंत्री बने रहेंगे। राउत ने विधायक के हवाले से दावा किया कि ऐसा माना जाता है कि वादे से उत्साहित होकर शिंदे ने चुनाव प्रचार में काफी धन खर्च किया लेकिन जब समय आया तो शाह ने कथित तौर पर अपना वादा नहीं निभाया जिससे शिंदे को महसूस हुआ कि उन्हें धोखा दिया गया है।

'शिंदे और उनके सहयोगियों पर नजर रखी जा रही'

संजय राउत ने कहा कि विधायक ने उन्हें यह भी बताया कि शिंदे को अब संदेह है कि उनके फोन कॉल की निगरानी की जा रही है और केंद्रीय एजेंसियां उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। उन्होंने दावा किया, 'एक विधायक ने मुझे बताया कि शिंदे को यकीन है कि उन पर और उनके सहयोगियों पर नजर रखी जा रही है।' भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री ने हाल में ‘तनाव’ की खबरों को खारिज किया था और कहा था कि फडणवीस और शिंदे के बीच कोई 'बड़े मतभेद' नहीं हैं। हालांकि राउत ने भाजपा नेता की बात को खारिज करते हुए कहा कि शिवसेना के विभाजन (जून 2022 में) से पहले भी इसी तरह के दावे किए गए थे लेकिन 'उसके बाद जो हुआ, वह पूरे देश ने देखा।'

राउत ने दावा किया, 'शिंदे का नेतृत्व अब सुरक्षित नहीं है।' उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा उनके (शिंदे) खिलाफ काम कर रही है। राउत ने कहा कि शिंदे के विपरीत उपमुख्यमंत्री अजित पवार अधिक मजबूत स्थिति में हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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